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बारिश की वह पहली बूंद…..

बैसाख के महीने में बारिश की वह पहली बूंद- पेश है बैसाख की बारिश को लेकर कविता की कुछ पंक्तियां….
By Archana Bhandari
बारिश की वह पहली बूंद

बैसाख के महीने में हार्ट अकैट आ जाए कुछ ऐसा कर जाती है
खाना पीना छोड़-छाड़ के
गेहूं को समेटने दौड़े चले जाते हैं
हमारी मेहनत पर कहीं बारिश की बूंदें ना पड़ जायें
इसलिए मोड़ और तिरपाल से ढक देते हैं

बारिश की वह पहली बूंद
बैसाख के महीने में हार्ट अकैट आ जाए कुछ ऐसा कर जाती है

जब तक बारिश की वो बूंदें रूक सी ना जायें
तब तक गालियां बरसती हैं बारिश व आसमान परपहाड़ी ठैरे बल हम
अपनी मेहनत को यू ही बेकार नही जाने देते

बारिश की वह पहली बूंद
बैसाख के महीने मे हार्ट अकैट आ जाए कुछ ऐसा कर जाती है

✍ अर्चना भंडारी, उत्तराखंड के बागेश्वर में रेड क्रॉस की सदस्य हैं और अक्सर कविता लेखन करती हैं✍

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