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कोरोना के खिलाफ जंग में सहयोग के लिए दोनों हाथ खोल कर दिया डोनेशन : रेजर पे

Report ring desk

नई दिल्ली।  आम जनता को उनकी वित्तीय समस्याओं का समाधान करने वाली प्रमुख फाइनेंशियल कंपनी, रेजर पे ने “द एरा ऑफ राइजिंग फिनेटक” रिपोर्ट का पांचवा संस्करण लॉन्च किया।  ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो यह रिपोर्ट फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के इको सिस्टम का पूरी गहराई से विश्लेषण करती है। रिपोर्ट में तिमाही आधार पर डिजिटल ट्रांसजेक्शन के पैटर्न और डिजिटल पेमेंट की सुविधा लोगों को देने के लिए इंडस्ट्री की ओर से की कई नई पहलों का अध्ययन किया जाता है। हालांकि इस बार, जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप से जंग लड़ रही है। ऐसे समय में इस बार की रिपोर्ट में भारत में 30 दिन के नेशनल लॉकडाउन में डिजिटल पेमेंट पर पड़े असर का विश्लेषण किया गया है।
आइए, इन 30 दिनों में हुई घटनाओं पर एक नजर डालते हैं। रिपोर्ट के सभी नतीजे रेजर पे के प्लेटफॉर्म पर हुए ट्रांसजेक्शन पर बेस्ड हैं। इस रिपोर्ट में लॉकडाउन से पहले 24 फरवरी से 23 मार्च और लॉकडाउन के दौरान 24 मार्च से 23 अप्रैल तक रेजर पे पर हुए डिजिटल ट्रांसजेक्शन के नतीजों का विश्लेषण किया गया।

बिजली, पानी, क्रेडिट कार्ड और फोन के बिलों का भुगतान ऑनलाइन
लॉकडाउन में कोरोना वायरस से बचाव के लिए लोगों को अपने घरों में सुरक्षित रखना पड़ रहा है। लोग अपने आवश्यक बिलों, जैसे बिजली, पानी, क्रेडिट कार्ड और फोन के बिलों का भुगतान ऑनलाइन ही कर रहे हैं। बिलों के ऑनलाइन पेमेंट में 73 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह आईटी और सॉफ्टवेयर तथा मीडिया और एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में क्रमशः 32 और 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
लॉकडाउन में कुछ क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। लॉजिटिक्स या ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में सप्लाई चेन बाधित होने से डिजिटल ट्रांसजेक्शन में 96 फीसदी की गिरावट आई। डिजिटल लेन-देन में ट्रैवल क्षेत्र में 87 फीसदी, रियल एस्टेट में 83 फीसदी, फूड एंड ब्रीवरेज के क्षेत्र में 68 फीसदी और किराने की सामान की खरीदारी में 54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
लॉकडाउन के दौरान एनजीओ को दिए गए ऑनलाइन डोनेशन (लेनदेन) में 180 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इससे यह झलक मिलती है कि तालाबंदी के दौरान लोग गरीबों और जरूरतमंदों की बढ़-चढ़कर मदद कर रहे हैं।
इन 30 दिनों में अहमदाबाद, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में डिजिटल ट्रांसजेक्शन में क्रमश : 43 फीसदी, 32 फीसदी और 25 फीसदी की गिरावट आई। अगर राज्यों के लिहाज से देखा जाए तो लॉकडाउन के दौरान डिजिटल लेन-देन में कर्नाटक ने सबसे ज्यादा 21 फीसदी का योगदान दिया। लॉकडाउन के दौरान डिजिटल ट्रांसजेक्शन को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने वाले 2 अन्य राज्य महाराष्ट्र और तेलंगाना रहे, जिन्होंने क्रमश: 16 फीसदी और 11 फीसदी का योगदान दिया। लॉकडाउन के दौरान गुजरात, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु में डिजिटल पेमेंट के सिस्टम का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में क्रमश : 41 फीसदी, 39 फीसदी और 26 फीसदी की गिरावट आई।
डिजिटल पेमेंट में यूपीआई का सबसे ज्यादा 43 पीसदी योगदान रहा। इसके बाद डेबिट और क्रेडिट कार्ड से 39 फीसदी लोगों ने पेमेंट किया। असके अलावा 10 फीसदी लोगों ने पेमेंट करने के लिए नेटबैंकिंग का सिस्टम अपनाया। हालांकि अगर लॉकडाउन से 30 दिन पहले के डिजिटल ट्रांसजेक्शन का ट्रेंड देखा जाए तो यूपीआई, काडर्स और नेटबैंकिंग से लेन-देन में क्रमशः 37 फीसदी, 30 फीसदी और 28 फीसदी की गिरावट आई थी।

छोटे शहरों और कसबों में मोबाइल वॉलेट ट्रांसजेक्शन में बढ़ोतरी


यूपीआई ऐप्स में गूगल पे ने 46 फीसदी शेयर के साथ सबसे ज्यादा योगदान दिया। फोन पे ने 29 फीसदी और पेटीएम का योगदान 10 फीसदी का रहा। लॉकडाउन के दौरान पेटीएम के इस्तेमाल में 47 फीसदी, गूगल पे में 43 और फोन-पे से 32 फीसदी डिजिटल ट्रांसजेक्शन में गिरावट आई।
पिछले 30 दिनों में देश के छोटे शहरों और कसबों में मोबाइल वॉलेट ट्रांसजेक्शन में बढ़ोतरी हुई। इसका कारण पीएम केयर्स फंड में लोगों का बढ़-चढ़कर योगदान देना था। इस अवधि में कैशबैक ऑफर से भी लोग मोबाइल वॉलेट ट्रांसजेक्शन करने के प्रति आकर्षित हुए। जियो मनी से डिजिटल लेनदेन में 66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अमेजन पे को डिजिटल पेमेंट के लिए इस्तेमाल करने वालों की तादाद 63 फीसदी और पेटीएम से ऑनलाइन करने वालों की संख्या 43 फीसदी बढ़ी। अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो इन 30 दिनों में डिजिटल पेमेंट करने वालों की संख्या में 30 फीसदी की गिरावट आई।
रेजर पे के सीईओ और सहसंस्थापक हर्षिल माथुर ने कहा, “नोटबंदी के बाद हम पहली बार लॉकडाउन के 30 दिनों में ऑनलाइन पेमेंट में आई 30 फीसदी की महत्वूर्ण गिरावट देख रहे हैं। लॉकडाउन से पहले मार्च के पहले 2 हफ्तों में कुल मिलाकर ऑनलाइन पेमेंट में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। पर लॉकडाउन के बाद घरों में ही सुरक्षित रहकर लोग कोरोना से बचने के लिए तमाम एहतियाती उपाय बरत रहे थे। इसी से इसमें गिरावट आई है। कोरोना वायरस से कई मोर्चों पर इस समय काफी अनिश्चितता है। ये महामारी फिनटेक इंडस्ट्री के लिए टर्निंग पॉइंट बनती जा रही है। इसमें एक महत्वपूर्ण बदलाव यह हुआ है कि लॉकडाउन के पिछले 30 दिनों में देश के छोटे शहरों और कसबों में लोगों ने डिजिटल पेमेंट को बड़े पैमाने पर अपनाया।“
उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि फिनटेक कंपनियों के लिए यह बहुत बड़ा मौका है। कुछ लोगों को कोरोना वायरस का दौर बीतने के बाद अपने बिजनेस मॉडल को फिर से स्थापित करना पड़ेगा।

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