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Special Story:जमीन पर करोड़ों की सिंचाई परियोजनाएं, किसानों की टकटकी आकाश की ओर

थीखोज़ वृहद उदवहन सिंचाई परियोजना से भी निकल रही भ्रष्टाचार की बू

भले ही बिहार, असम, महाराष्ट्र तथा दिल्ली सहित आधा देश बारिश और भयंकर बाढ़ का कहर झेल रहा हो, यहाँ पश्चिमी ओड़िशा के इस कालाहाण्डी क्षेत्र में जुलाई के अन्तिम सप्ताह तक भी सूखे की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते खेती-किसानी का काम पूरी तरह रुका हुआ है और किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट तौर पर परिलक्षित हो रही हैं। इसे भी चिर-सूखा प्रपीड़ित कालाहाण्डी का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि सूखे से निज़ात दिलाने मोटी लागत से बनाई गयीं सिंचाई परियोजनाएं भी पूरी तरह नाकामयाब रही हैं।

By Suresh Agrawal, Kesinga, Odisha

यह जान कर किसी को भी हैरत हो सकती है कि सूखा प्रपीड़ित ज़िले में कृषि एवं किसानों के जीवन में खुशहाली लाने ज़िले के सात स्थानों पर करोड़ों की लागत से वृहद सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण किया गया, परन्तु जैसा कि होता आया है कि तमाम सरकारी परियोजनाओं की तरह ये परियोजनाएं भी अपने भाग्य पर आँसू बहा रही हैं। त्रुटिपूर्ण संस्थापन के कारण खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिसके चलते कृषि-कार्य ठप है और किसान अपना सर थामे आकाश की ओर टकटकी लगाये बैठा है। प्रश्न उठता है कि भारी-भरक़म लागत एवं आधुनिक ज्ञान-कौशल का इस्तेमाल करते हुये बनाई गयी परियोजनाएं क्यों कर विफल हो सकती हैं। क्या इसके लिये किसी की ज़वाबदेही नहीं बनती ?

सरकारी परियोजनाएं किस प्रकार काम करती हैं, उसकी एक मिसाल केसिंगा प्रखण्ड अन्तर्गत हाथीखोज़ वृहद उदवहन सिंचाई परियोजना को देख कर दी जा सकती है। कुल 3594 लाख की लागत से बनी परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा वर्ष 2018 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये किया गया था। ग्राम राज़ापड़ा के समीप तेलनदी पर निर्मित उक्त वृहद सिंचाई प्रकल्प में कुल 8.49 किलोमीटर लम्बी पीएससी पाइपलाइन बिछाई गयी है, जबकि एचडीपीई पाइप लाइन की लम्बाई 30.93 किलोमीटर है। कुल 119 आउटलेट्स वाली परियोजना में 343 अश्व-शक्ति विशिष्ट कुल पांच पम्प लगे हैं। लेकिन सब व्यर्थ, क्योंकि खेतों में पानी नहीं पहुँच पा रहा है। ख़ास कर केसिंगा प्रखण्ड में खेती-किसानी का काम रुका हुआ है और वर्षाभाव के कारण खेतों में दरार पड़ने लगी हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हाथीखोज़ वृहद सिंचाई परियोजना से तालभंअरा, सिर्जापाली, खुलिहारीगुम्पा, केंदुबाहाली, पीपलपदर, हाथीखोज़, बादीपड़ा, दिगसिरा, राज़ापड़ा तथा बेलखण्डी सहित आयकट क्षेत्र का कोई दो हज़ार हेक्टेयर रकबा सिंचित होना था, परन्तु सब फ्लॉप और किसी पर ज़वाबदेही तय नहीं।

मौके पर पहुँच किसानों से बातचीत करने पर ज्ञात हुआ कि स्थिति की ओर विभागीय आला अधिकारियों के अलावा स्थानीय विधायक का भी ध्यानाकृष्ट किया जा चुका है, परन्तु किसी के पास सटीक उत्तर नहीं है। इसे कहते हैं -आकाश से गिरे और ख़जूर पर अटके। जनता अपनी ही गाढ़ी कमाई की यूँ बर्बादी होते देख रही है, परन्तु वह विवश है और आँसू बहाने के सिवाय उसके पास कोई विकल्प नहीं है।

ज्ञातव्य है कि मीडिया में ख़बर आने के बाद विभागीय अधिकारी एवं कार्यकारी अभियंता आदि द्वारा प्रकल्प का दौरा किया गया है, परन्तु सभी का ज़वाब गोलमोल है। अलबत्ता, सूचना माध्यमों के पूछे जाने पर नर्ला विधायक भूपिन्दर सिंह ने इतना अवश्य कहा है कि समस्या के बारे में उन्हें किसानों से जानकारी मिली है और वह यथाशीघ्र समस्या दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि उदवहन सिंचाई विभाग टिटिलागढ़ मण्डल के कार्यकारी अभियंता गौरांग मण्डल का कहना है कि विद्युत ग्रिड में गड़बड़ी के कारण मोटर ठीक से काम नहीं कर रही हैं एवं गत एक सप्ताह में प्रकल्प की तीन मोटरें जल जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है और अब महज़ दो मोटरों से काम चलाया जा रहा है। हमने विद्युत समस्या दूर करने ग्रिड अधिकारियों को पत्र लिख दिया है। लगता है कि इतना कह कर सभी ने अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है, परन्तु यक्ष-प्रश्न अभी भी बना हुआ है कि परियोजना विफल हुई तो क्यों ?

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