साहित्य

आओ मनाए मिलकर जश्न आजादी का…

By Harish

आओ मनाए मिलकर
जश्न आजादी का
जश्न तिरंगे को
सम्मान, स्वाभिमान व
गौरव दिलाने का,

कल तक जो थे गुलाम
न थी आज़ादी और न ही
स्वाभिमान से जीने देते
आज देखो कैसे
बढ़े कदम खुद को, देश को,
इस धरा को गुलामी से
निजात दिलाने को,

कभी इन्होंने हमें
जानवर समझा
हमें ही लूटा
आज ही के दिन
भागे ये सरपट
जब सच्चे हिंदुस्तानियों का
गुस्सा इन पर फूटा,

इस आज़ादी के पथ पर
जन्मे अनेक,
कभी महात्मा गांधी
जिन्होंने सत्य की
राह अपनाई
इन गोरों से भारत वर्ष को
स्वतंत्रता दिलाई,

कभी जन्मे वीर सपूत
भगत सिंह से
जो लड़े अपनी आज़ादी को
उनके बढ़े कदम
गोरों की बर्बादी को
इंकलाब जिंदाबाद की गूँज
और अंग्रेजों में खौफ़
इनसे पनपा था,
ऐसा एक वीर
सदियों में जन्मा था,

कभी सदियों में जन्मी
वीरांगना ऐसी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी
लक्ष्मी बाई नाम था जिनका
गोरों के खिलाफ
युद्ध छेड़,

स्वतन्त्रता में योगदान
दिया था जिन्होंने
बिजली सी चमक थी
तेज तलवार ,
और संग में तीर, धनुष,
कृपाण, कटार ,,

हरीश, हरदा पहाड़ी

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