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प्रदूषण की समस्या से कैसे निपट रहा है चीन

प्रदूषण से निपटने के लिए चीन लगातार कदम उठा रहा है, इसका असर चीन के बड़े शहरों में देखा जा सकता है।

अनिल आजाद पांडेय बीजिंग

चीन प्रदूषण से किस तरह से मुकाबला कर रहा है, यह जानना जरूरी हो जाता है। आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में चीन सरकार ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जिसका असर चीन के महानगरों और शहरों में दिखने लगा है। सबसे प्रमुख उपायों में से एक कोयले से चालित कारखानों में वैकल्पिक व नई ऊर्जा के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। शहरों में वाहनों की संख्या नियंत्रित करने साथ-साथ हरित विकास पर भी चीन सरकार ध्यान दे रही है। बताया जाता है कि देश के 338 शहरों में अच्छे मौसम के अनुपात में 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जबकि पीएम 2.5 के घनत्व में 9.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है। इससे जाहिर होता है कि चीन प्रदूषण की समस्या से निपटने में कितनी मुस्तैदी से काम कर रहा है।

जैसा कि हम जानते हैं कि तीन-चार वर्ष पहले बीजिंग में धुंध और प्रदूषण ने पूरी दुनिया की मीडिया का ध्यान खींचा, यहां तक कि स्कूल और ऑफिस बंद कर दिए गए। सरकार ने इससे सबक सीखते हुए विभिन्न कदम उठाए। अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि बीजिंग में प्रदूषण की स्थिति पहले से बहुत बेहतर हो चुकी है। बीजिंग में कोयले से चलने वाली हीटिंग के बजाय गैस का प्रयोग किया जाने लगा है। इसके साथ ही ठंड के दिनों में शहर में चलने वाले तमाम निर्माण कार्य भी बंद कर दिए जाते हैं।

 चीन सरकार के संबंधित मंत्रालयों द्वारा लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने के लिए किए जा रहे प्रयास साल 2019 में भी जारी रहेंगे। चीन सरकार का कहना है कि नीले आसमान के संरक्षण संघर्ष का उच्च स्तरीय डिजाइन पूरा हो चुका है। चीन 2019 में प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने का काम जारी रखेगा। इतना ही नहीं पारिस्थितिकी व्यवस्था के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वैश्विक जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के संरक्षण कार्य में भी सक्रियता से हिस्सा लेगा।

गौरतलब है कि समूचा विश्व जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रहा है। चीन इस दिशा में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले सम्मेलनों और सहयोग कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर शिरकत करता है। साथ ही घरेलू स्तर पर भी जलवायु परिवर्तन की चुनौती के मुकाबले में लगा है। चीन सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2005 की तुलना में 2018 में चीन में जीडीपी की इकाई कार्बन निकासी में 45.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी। साथ ही चीन ने ग्रीन हाऊस गैस की निकासी कम करने में भी अहम रोल अदा किया है।

 

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