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लाॅकडाउन में युवाओं ने पहाड़ जैसी समस्याओं को ऐसे किया हल

By Hamant Rawat

नैनीताल। लाॅकडाउन में पहाड़ के गांव आबाद हो गए हैं। प्रवासियों से कोरोना का खतरा तो बना है इसके बावजूद गांवों में चहल पहल है। शाम को चौपाल  भी लग रही है। इसमें किस्से-कहानियां भी होती हैं तो भविष्य की चिंता से जुड़े सवाल भी। कुछ गांवों में तो युवाओं ने काबीलेतारीफ काम किया है और फाइलों में रेंगने वाले सरकारी विकास को आइना दिखाया है। युवाओं ने कई गांवों तक सड़क पहुंचा दी अब पानी के प्रबंध में भी जुटे हैं। इन उदाहरणों ने जता दिया है कि एकजुट होकर असंभव को भी संभव में बदला जा सकता है।

युवाओं के विकास की इस पहल से नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लाक का नाई गांव भी चर्चा में है। इस गांव के युवा जल संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। वे गांव के आसपास के जंगलों में बरसात के पानी को जमा करने के लिए खाइयां खोद रहे हैं । इन युवाओं की मानें तो वे बीस खाइयां खोद चुके हैं। इनमें 5 हजार से लेकर 12 हजार लीटर तक पानी जमा हो सकता है।
नाई गांव के युवाओं का कहना है कि पहाड़ों से बारिश का पानी बहकर चला जाता है। इसका असर गर्मियों में देखने को मिलता है। नौले और जल स्रोत सूखने लगते हैं। यदि बारिश का पानी इन खाइयों में जमा रहेगा तो इससे स्रोत रिचार्ज होंगे। जंगली जानवरों की भी प्यास बुझेगी। जंगलों में हरियाली भी बनी रहेगी।

पर्यावरण कार्यकर्ता चंदन सिंह नयाल बताते हैं, वह ग्रामीण युवाओं के साथ जल संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। लाकडाउन में करीब बीस खाइयां खोद चुके हैं। इससे जल स्रोत रिजार्च होंगे और तालाबों के किनारे नमी होने से आग लगने का खतरा कम हो जाता है। गर्मियों में पैदा होने वाला पानी का संकट भी नहीं रहेगा।

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