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मॉस्क बनाने में क्वालिटी का कितना ध्यान रख रही चीनी कंपनियां

चीन ने गत् 1 मार्च से 25 अप्रैल के बीच कुल 21.1 अरब मॉस्क का निर्यात किया। मास्क का इतनी भारी मात्रा में निर्यात यह दर्शाता है कि दुनिया भर में कितनी डिमांड है। हालांकि वायरस के प्रभाव के कारण विमान सेवाएं बाधित होने से मॉस्क के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर समस्या भी खड़ी हो रही है।

By Anil Azad pandey, Beijing

जब से विश्व भर में कोविड-19 की महामारी ने पैर पसारे हैं, तब से मॉस्क की डिमांड में भारी इजाफा इजाफा हुआ है। कोई भी देश अपने यहां पूरी तरह से मॉस्क व ग्लव्ज़ आदि बचाव संबंधी चीज़ों की मांग पूरा करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में मॉस्क बनाने वाली कंपनियों पर बहुत दबाव है। इस बीच कुछ देशों का आरोप है कि चीन में वायरस से बचाव संबंधी उपकरणों में खामियां सामने आ रही है।

इसे देखते हुए हमने बीजिंग स्थित एक मॉस्क उत्पादक कंपनी का दौरा करने का फैसला किया। ताकि चीन में मॉस्क आदि की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब खोजे जा सकें। मीडिया में आ रही खबरों को देखते हुए मेरे मन में भी आशंका थी कि चीन में पीपीई किट, टेस्टिंग किट के निर्माण में कोई कमी तो नहीं है। लेकिन जब हम थूलिंग कंपनी के प्रोडक्शन सेंटर पहुंचे तो लगा कि वहां पर साधारण मॉस्क बनाने में भी क्वालिटी का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कच्ची सामग्री जो कि पहले जापान से आयात की जाती थी, लेकिन कुछ समय से जापान द्वारा निर्यात पर पाबंदी लगाए जाने से अब देश के भीतर से ही आपूर्ति की जा रही है। इसके बाद भी कंपनी गुणवत्ता का अच्छी तरह से ख्याल रखती है।

सरकारी एजेंसियां महीने में तीन बार करती हैं क्वालिटी की जांच

वहां मॉस्क बनाने के लिए जरूरी सभी मापदंडों की गारंटी की जाती है। अभी तक कंपनी द्वारा तैयार किए गए मॉस्क में कोई भी कमी नजर नहीं आयी है। हालांकि यह कंपनी सर्जिकल मॉस्क तैयार नहीं करती है। क्योंकि सर्जिकल मॉस्क बनाने के लिए ज्यादा बेहतर क्वालिटी के फेब्रिक की जरूरत होती है। बताते हैं कि कोरोना वायरस फैलने से पहले यह कंपनी सिर्फ मेडिकल उपकरण बनाती थी। लेकिन मॉस्क की भारी जरूरत के मद्देनजर कंपनी इन्हें तैयार करने लगी है।
कंपनी के चीफ मैनेजर वू वेई ने हमें बताया कि कुछ चीज़ों में चीन में मॉस्क उत्पादन के मानक विदेशों से भी ज्यादा कड़े हैं। संबंधित सरकारी एजेंसियां हर महीने में तीन बार क्वालिटी की जांच करती हैं।

मॉस्क के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर खड़ी हो रही समस्या 

अभी इस कंपनी में दो उत्पादन लाइनें चल रही हैं, जिनमें रोजाना 1 लाख से अधिक मॉस्क बनाए जाते हैं। जबकि कोरोना वायरस महामारी शुरू होते वक्त यहां सिर्फ 10-20 हज़ार मॉस्क ही तैयार हो पाते थे। महामारी के वैश्विक फैलाव से मॉस्क की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गयी है। ऐसे में विश्व की तमाम कंपनियों पर उत्पादन बढ़ाने का दबाव साफ नज़र आता है।
अब तक इस कंपनी ने पाँच लाख से अधिक मॉस्क अमेरिका में भेजे हैं। जबकि जापान में दस लाख से ज्यादा मॉस्क निर्यात किए गए हैं। बताया जाता है कि चीन ने गत् 1 मार्च से 25 अप्रैल के बीच कुल 21.1 अरब मॉस्क का निर्यात किया। मास्क का इतनी भारी मात्रा में निर्यात यह दर्शाता है कि दुनिया भर में कितनी डिमांड है। हालांकि वायरस के प्रभाव के कारण विमान सेवाएं बाधित होने से मॉस्क के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर समस्या भी खड़ी हो रही है।

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