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व्यंग्य-जानिए टिंबकटू में खोरोना होने की दास्तां

 
एक बार  टिंबकटू द्वीप के राजा पंप को बताया गया  कि पता चला है कि चिंग चिंग द्वीप में खोरोना महामारी हो गई है। चिंग चिंग द्वीप के लोग मरने लगे हैं। टिंबकटू द्वीप मे चिंग चिंग द्वीप से भी व्यापार करने लोग आते हैं। इसलिए टिंबकटू द्वीप में भी महामारी का खतरा है। उसने राज्य के वैद्यों को बुलाया और उनसे पूछा। सबने कहा कि मामला बहुत संकटपूर्ण हो सकता है। प्रजा को कहा जाए कि वह घर में ही रहे। पंप ने हवा में मुट्ठी लहराई और कहा कि हमारी चिकित्सा व्यवस्था की असली हालत मैं जानता हूँ।
 

लेखक जाने-माने आलोचक हैं और पूर्व में ब्रिटेन व फीजी में राजनयिक भी रह चुके हैं

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By Anil Sharma ‘Joshi’
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एक द्वीप था – टिंबकटू । उसकी प्रजा सब प्रकार से समृद्ध और सुखी थी। उसे पृथ्वी पर स्वर्गलोक जैसा माना जाता था। इतना सुखी – इतना सुखी कि वहाँ चाकलेट के पहाड़ दिखाई देते थे । आईसक्रीम की नदियां बहती थी। पिज्जा के पठार थे। मैक़डानल्ड के नोन वेज बर्गर की घाटियां थी। । बच्चे पैदा होते ही मां का दूध नहीं  बल्कि कोक या पेप्सी मांगते थे।
 

उस देश का राजा पंप था । उसका नाम पंप था पर वह दरअसल लोगों में हवा भरने का नहीं, निकालने का काम करता था। उसमें खुद में हवा भरी रहती थी ।वह अपने चुटकलों के लिए विख्यात था। न .. ना वे चुटकले नहीं कहता था। दरअसल वह  बातें सीरीयसली ही लिखता था। पर दुनिया उसके चुटकलों पर हँसा करती थी। उस जमाने में उनके चुटकलों को ट्ववीट कहा जाता था। वह ट्वीट में आम तौर पर बीट करता था। पर उसकी ताकत की वजह से बहुत से लोग बीट को उसकी कृपा का प्रसाद ही मानते। वह कभी कह देता कि किसी द्वीप को चुटकियों में उड़ा देंगे। कभी कहीं दीवार खड़ी करने की बात करता । वह अपने दोस्तों को डराता और दुश्मन डर जाते थे कि अगर यह दोस्तों की ऐसी -तैसी कर रहा है तो दुश्मनों के साथ क्या करेगा। सनकी है.. इससे दूर रहो।

 
एक बार  टिंबकटू द्वीप के राजा पंप को बताया गया  कि पता चला है कि चिंग चिंग द्वीप में खोरोना महामारी हो गई है। चिंग चिंग द्वीप के लोग मरने लगे हैं। टिंबकटू द्वीप मे चिंग चिंग द्वीप से भी व्यापार करने लोग आते हैं।  इसलिए टिंबकटू द्वीप में भी महामारी का खतरा है।  उसने राज्य के वैद्यों को बुलाया और उनसे पूछा।  सबने कहा कि मामला बहुत संकटपूर्ण हो सकता है। प्रजा को कहा जाए कि वह घर में ही रहे। पंप ने हवा में मुट्ठी लहराई और कहा कि हमारी चिकित्सा व्यवस्था की असली हालत मैं जानता हूँ।
 
 
हमारे चिकित्सालयों में वैद्यों के पास काफी दिनों से कोई केस नहीं आ रहे हैं। शिकायत आई है कि वे सड़क पर चलते स्वस्थ लोगों को ललचाई नजरों से देखतेे हैं। कईयों को तो वे अस्पताल के अंदर फ्री रेस्टोरेंट है- कहकर ले जाते हैं।  सामान्य मरीजों को भी ढूंढ कर लाना ऐसे कठिन होता जा रहा है जैसा बंबू द्वीप में नसबंदी के लिए लोगों को हस्पतालों में लाना  ।  कुछ दिन पहले ़डॉक्टरों ने यहाँ तक प्रस्ताव दिया था कि अगर टिंबकटू द्वीप में मरीज कम हैं तो उन्हें बाहर से मरीज आयात करने की अनुमति दी जाए।  श्मसान घाटों में भारी डिस्काऊंट है।  पादरियों को मौत पर बोले जाने वाली प्रार्थना ही भूल गई है।  दवाईयां गोदामों में पड़े – पड़े  एक्सपायर हो जाती है। जिनको दवाई देते भी हैं वे भी गूगल डॉक्टर से पूछते हैं कि दवाई खानी चाहिए या नही । हम एशिया और अफ्रीका के द्वीपों  में हो रही महामारियों के शोध  पर पैसा लगा रहे हैं और इधर हमारे पास दुनिया में बेचने के लिए हथियार बनाने के पैसे की कमी पड़ रही है। इसलिए बीमारियों पर  होने वाले शोध भी बंद कर दिए गए हैं। द्वीप के दूरगामी हित में है कि एक बार इसे आने दो । इसे हर्ड एफेक्ट  कहा गया । उसे मतलब बताने को कहा गया तो उसने उदाहरण दिया कि आदमीं गंजे कहकर कब बुलाए जाते हैं । जब ज्यादातर लोगों के बाल हो ।अगर देश ही गंजों का हो तो कौन किसका मजाक उडाएगा। हम सबको खोरोना करवा देंगे। पंप के मंत्रियों ने उसे बड़ी मुश्किल से समझाया।
 
 
पंप के पास झंप , खंप , लंप जैसे दोस्त थे। उन्हें लगा खोरोना के चक्कर में उन्हें नुकसान हो जाएगा। उन्होंने पंप को कहा कि यह चिंग चिंग की साजिश है। वह चाहता है कि खोरोना के चक्कर में हम अपनी दुकाने बंद कर दें और उनका अलीबाबा और चालीस चोर टिंबकटू द्वीप की सारी नगदी उड़ा कर ले जाए। पंप ने  झंप , खंप, लंप जैसे दोस्तों की बात मानी और वैद्यों को डांटा और कहा कि हमें खोरोना पर  नहीं अलीबाबा चालीस चोर पर नज़र रखनी है।
 
 
इधर चिंग चिंग की खोरोना टिंबकटू पहुँच गई । वैद्याों ने तो काफी पहले से बता दिया था कि हमारी विज्ञान की बड़ी शोध दुनिया को केवल यह दिखाने के लिए है कि हम सबसे शक्तिशाली द्वीप है । इन पहाड़ों के नीचे मरी हुई चुहिया ही है।  आजकल  चिंग चिंग का असर इतना ज्यादा है कि हमारी लेबोरिट्रीयों में पाजामें  बनाने से लेकर चंद्रयान उड़ाने तक सारी परियोजनाएं पर चिंग चिंग का कब्जा है। हमारी पीजा में बेस उसी का है। हमारी आईसक्रीम में उसी की मिठास है। हमारे धनुष के तीरों में धार चिंग चिंग से ही आती है।
 
 

एक बात और थी टिंबकटू द्वीप के कुछ निवासी बहुत अंहकारी ,  बहुत  लापरवाह थे। उन्हें लगा कि उनके यहां के सैटेलाइट चांद और कई ग्रहों तक पहुंच गए है। परमाणु बम बना चुके हैं। यह कोरोना किस खेत की मूली है। वैसे भी वे चिंग चिंग द्वीप, बंबू द्वीप और अफ्रीका स्थित झंडू द्वीप के निवासियों को गाजर मूली समझते थे। उनका विश्वास था कि  कोरोना से इन द्वीपों के निवासी तो गाजर मूली की तरह खत्म हो जाएंगे पर हम जैसे टर्मिनेटरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला। उन्हें केवल अलीबाबा चालीस चोर की चिंता सता रही थी।
उनमें से कई चाहते थे बस उनके मदिरालय, वैश्यालय , जुआलय चलते रहने चाहिएं।  दिन में समुद्री तटों पर मस्ती होती रहे  । रात में मिस टिंबक टू बांहों में सोती रहे । ऐसा नहीं उन्हें खोरोना के बारे में बताया नहीें गया पर पंप की तरह उनमें खूब हवा भरी थी। वे खोराना का मजाक उड़ाते थे।

पर पंप के इन तुगलकी फरमानों की कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ी । देश में त्राहि त्राहि हो गई। दुनिया के सबसे बुद्धिमान , आधुनिक माने जाने वाले द्वीप में कभी ऐसा होगा किसी ने सोचा न था। शहर के शहर वीरान थे। चीलें उड़ रही थी। बहुत ही दुखद दृश्य था।

 
अब तो हर जगह से खोरोना से डिंग डिंग याने डेथ की खबर आने लगी । पंप की बातों पर जो पहले मुंह छुपा कर मुस्कराते थे । अब ठहाके मार कर हंसने लगे। पंप ने स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की।   उसने बताया  कि वह ठेकेदार होने से पहले एक झोलाछाप वैद्य भी रहा है। उसने लोगों को देसी नुस्खे बताने शुरू किए।  इसे पंप थेरेपी का नाम दिया गया। यह अपने समय की बहुत बड़ी इजाद थी। जिसके लिए मेडिसन के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार देने तक पर विचार हुआ। यह आर -पार का खेल था। उसके विचार से इस महामारी का जन्म कीटाणु से हुआ है तो बस कीटाणु मारने वाला इंजेक्शन पिछवाड़े में ठोक दो । देखते -देखते पंप थेरेपी लोकप्रिय हो गई। जिस मरीज को पंप थेरेपी देने की बात करते थे। वह थर- थर कांपने लग जाता था । कुछ मरीजों ने इस थेरेपी लेने की तुलना में आत्महत्या करना ज्यादा पसंद किया।  उधर उसने घर की प्रयोगशाला में वैक्सीन भी विकसित करनी शुरू की । पूरा टिंबकटू भगवान से दुआएं कर रहा  हैं कि वह विकसित ना हो । अगर पंप वैक्सीन विकसित हो गई तो मरने वालों की संख्या में कम से कम कई जीरो और लग जाएंगे।   पंप को लगता था कि ये बातें तो कामन सेंस की हैं  लोगों को समझ क्यों नहीं आती ! वह समय का सिकंदर था चाहे बातें वह चुकंदर वाली करता हो। वैसे सिंकंदर और  चुकंदर में फर्क भी कितना होता है!

उधर हाहाकार मचने लगा था सारी दुनिया में खोरोना फैल चुका था। दुनिया घरों में दुबक पर बैठ गई थी । पर टिंबकटू देश के नजारे अलग थे। पंप रोज झोले से नया नुस्खा बता रहा था। लोगो न हँसना छोड दिया था पर रोने की ताकत नहीं रह गयी थी।। हँसते हँसते लोग रोेने लगे। हंसते हंसते लोग मरने लगे। रोते रोते लोग थक गए। पंप हवा निकले हुए गुब्बारे की तरह पिचका हुआ था। कोरोना ने टिंबकटू की डिंग़डिंग  मतलब ऐसी की तैसी कर  दी थी।  टिंबकटू द्वीप ने और दुनिया में पहली बार अपने नेता को निचुड़ा देखा। उसके झोले के सारे जोकर निकल चुके थे। वह खुद  मात की बिसात पर बैठकर जोकर लग रहा था। चिंग चिंग मंद मंद मुस्करा रहा था।

 
 
अनिल शर्मा ‘ जोशी ‘  – कवि , व्यंग्यकार , आलोचक । प्रकाशित काव्य संग्रह -मोर्चे पर , नींद कहाँ हैं , आलोचनात्मक पुस्तक – प्रवासी लेखन : नई ज़मीन , नया आसमान । पूर्व राजनयिक – ब्रिटेन और फीजी में राजनयिक के रूप में काम करने का अनुभव । विश्व हिंदी सम्मेलन ,  न्यूयार्क 2007 का डेस्क अधिकारी के रूप में संयोजन ।हिंदी की अंतरराष्ट्रीय संस्था अक्षरम का अध्यक्ष ।
विभिन्न पुस्तकों / पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित। 
 
Anil Sharma

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