कला संस्कृति देश दुनिया

बड़े भोले से बन फैला रहे हैं वायरस..

कोरोना वायरस की महामारी के दौर में लॉकडाउन जारी है। कई लोग ऐसे हैं जो इस वायरस की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं और बेवजह बाहर निकलने के लिए बहाने ढूंढ रहे हैं। इसी विषय पर केंद्रित हैं, जानी मानी लेखिका अनीता शर्मा द्वारा लिखी गयी कुछ पंक्तियां..
…………………………
By Dr. Anita sharma, Shanghai
……………………………..
……………………….
यह प्रश्न है आपसे,

इससे, उससे  सबसे

जो लॉक डाउन को झेल नहीं पा रहे हैं,
जो बाहर जाने के लिए फड़फड़ा रहे हैं।
बोरियत के नाम पर घर में मजमा लगा रहे हैं
बाल बढ़ गए तो नाई को घर में बुलवा रहे हैं

थोड़े दिन इक जीभ ना संभले ,
बाहर से पिज़्ज़ा, बर्गर मँगवा रहे हैं
बाइक उठा बाहर चक्कर लगा रहे हैं
सोशल-डिसटेंसिंग का मज़ाक़ बना रहे हैं
बिना मास्क पहने यूँ ही घूमने जा रहे हैं
बड़े भोले से बन वायरस फैला रहे हैं

क्या यह सब करते
आपको ग़लत नहीं लगता ?
क्या अपनों को खोने का डर
आपको नहीं लगता ?आपको, इसको, उसको,सबको
देखा है डॉक्टर के सामने गिड़गिड़ाते
डॉक्टर को झट से भगवान बनाते
कैसे भी बचालो, कहके हाथ फैलाते

ये भगवान, सर पर कफ़न बाँध
कर्तव्य निभाते हैं,
अपने फूल जैसे बच्चे कमरे में बंद कर,
आपको बचाने आते हैं ।

इनके बच्चों को
कोई भगवान नहीं सम्भालता,
आपका भगवान फ़र्ज़ की ख़ातिर,
बच्चे भी ढंग से नहीं पालता।

भगवान के बाद अब है आपकी बारी
करोना से कैसे है बचना, यह खबर आपको सारी,
घर में ही रहके, दूर से नमस्ते कहके
बारम्बार हाथ धोने को भी धीरज से सहके
करोना से बच जाओगे
डॉक्टर ही नहीं,
आप भी सहयोग करोगे
तो शत प्रतिशत बचके निकल जाओगे।आपकी, इसकी, उसकी
भगवान पर श्रद्धा भारी है,
भगवान के बाद कर्तव्य निभाने की
अब आपकी बारी है
हाँ ! आपकी, इसकी, उसकी
सबकी की बारी है।।

————————✍️

डॉक्टर अनीता शर्मा (सखी) चौदह वर्ष से शंघाई चीन में निवास, अपना व्यवसाय कर रही हैं। कहानी, कविताएँ और लेख अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *