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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात से हटा बैन ,भारत जरूरतमंद देशों को करेगा सप्लाई

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कोरोना वायरस के मरीजों के लिए कारगर मानी जा रही मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर लगा बैन भारत ने आंशिक तौर पर हटा दिया है। भारत ने कहा है कि घरेलू जरूरत का हिसाब लगाने के बाद ही कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित देशों की मांग पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति को लेकर फैसला लिया जाएगा। बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन कर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की आपूर्ति की गुहार लगाई है।

हिन्दुस्तान अखबार की खबर के अनुसार हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर आंशिक तौर पर बैन हटा दिया गया है मगर पारासिटामोल का निर्यात प्रतिबंधित रहेगा। अखबार आगे लिखता है कि घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की उपलब्धता के आधार पर ही देशों द्वारा की गई मांग को मंजूरी दी जाएगी। कोविड -19 महामारी से संबंधित मानवीयता के आधार पर फार्मास्यूटिकल्स विभाग और विदेश मंत्रालय इस दवा के निर्यात और आवंटन पर निर्णय लेगा।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 25 मार्च को इस दवा के निर्यात पर रोक लगा दी थी। हालांकि, डीजीएफटी ने कहा था कि मानवता के आधार पर कुछ निर्यात की अनुमति दी जा सकती है।
अमेरिका लगातार भारत से इस दवा की मांग कर रहा है। ट्रंप ने फोन पर पीएम मोदी से कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट्स की आपूर्ति की मांग की थी। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की मांग करने वाले देशों में अमेरिका के अलावा ब्राजील, रूस, इजरायल, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन,अबू धाबी आदि देश शामिल हैं।

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