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Corona के खिलाफ लड़ाई में कितनी भूमिका है इम्यून सिस्टम की, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

वर्तमान में कोरोना वायरस के रूप में एक नए तरीके के हालात पूरे विश्व में पैदा हो गए हैं जिसने हमारी जीवन शैली, काम-काज के तरीकों और सामाजिक सम्बन्धों को पूरी तरह बदल डाला है। आज सम्पूर्ण मानव जाति अपने जीवन पर आए संकट से न केवल लड़ रही है बल्कि आने वाले हालातों के लिए खुद को तैयार भी कर रही है। बेहतर जीवन पद्धति विकसित करने में भारतीय जीवन पद्धति, ध्यान, योग तथा आयुर्वेद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं

हर जीवित शरीर में प्रकृति ने एक ऐसी व्यवस्था बनाई हुई है, जो उसे नुकसानदेह जीवाणुओं, विषाणुओं से बचाती है, इसे ही रोगप्रतिरोधक शक्ति या इम्यूनिटी कहा जाता है। जब कोई वायरस किसी व्यक्ति के `शरीर पर हमला करता है तो शरीर का इम्यून सिस्टम कई तरह के एंटीबॉडी पैदा करता है। ये एंटीबॉडी वायरस के खास लक्षणों की पहचान कर उस पर हमला शुरू कर देते हैं। यह हमला तब तक जारी रहता है, जब तक वायरस शरीर में पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाते।

By khajan Pandey, Delhi

कोरोना वायरस के संक्रमण को काबू में करने के लिए अभी तक कोई भी प्रभावशाली वैक्सीन विकसित नहीं हो पायी है। फिर वो कौन से कारण हैं जिसके चलते संक्रमित मरीज ठीक हो रहे हैं या उनमें इसके गंभीर लक्षण नहीं हैं? कोरोना वायरस के साथ एक शब्द जिसका ज्यादा उपयोग हो रहा है, वह है इम्म्यून सिस्टम यानि रोग प्रतिरोधक शक्ति। आपने अपने आसपास अक्सर देखा होगा कि सेहत और कद-काठी के मामले में लगभग एक जैसे दिखने वाले लोगों में से कुछ लोग बार-बार बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं, जबकि कुछ पर मौसम की मार या संक्रमण वगैरह का ज्यादा असर नहीं होता। यह क्यों होता है ? असल में हर जीवित शरीर में प्रकृति ने एक ऐसी व्यवस्था बनाई हुई है, जो उसे नुकसानदेह जीवाणुओं, विषाणुओं से बचाती है, इसे ही रोगप्रतिरोधक शक्ति या इम्यूनिटी कहा जाता है। जब कोई वायरस किसी व्यक्ति के `शरीर पर हमला करता है तो शरीर का इम्यून सिस्टम कई तरह के एंटीबॉडी पैदा करता है। ये एंटीबॉडी वायरस के खास लक्षणों की पहचान कर उस पर हमला शुरू कर देते हैं। यह हमला तब तक जारी रहता है, जब तक वायरस शरीर में पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाते।

इसीलिए कोरोना वायरस के सन्दर्भ में ये कहा जा रहा है कि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता यदि मजबूत हो तो उस व्यक्ति की इस वायरस से जीतने की संभावना दूसरों के मुकाबले अधिक रहती है। किसी भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता जन्म से ही होती है। अपने दैनिक आहार, क्रिया-कलापों द्वारा हम इसे समय के साथ घटाते-बढ़ाते रहते हैं। स्वस्थ दिनचर्या, खान-पान और अनुशासन द्वारा रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत की जा सकती है।
कोरोना वायरस महामारी के दौर में उपचार से बेहतर बचाव सबसे बड़ा हथियार साबित हो रहा है है। शारीरिक दूरी के साथ अपने खान-पान के तौर तरीकों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर इस वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति और परम्परा में कई ऐसे तरीके और उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

आधुनिकता व पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में आकर हमने अपनी संस्कृति, ज्ञान को पिछड़ा या अनुपयोगी मानकर दरकिनार कर दिया था किन्तु आज कोरोना वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में हमारा पारम्परिक ज्ञान, योग, आयुर्वेद उपयोगी साबित हो रहे हैं। भारत अब तक बिना किसी दवा के,अपने खान-पान, पारम्परिक ज्ञान से इस जानलेवा बीमारी के संक्रमण को निंयत्रण में रख पाने में कामयाब रहा है। हमारे खान-पान के तरीकों जिसमें आंवला, नीबू, अदरक, लहसुन,कच्ची हल्दी,तुलसी,शहद आदि का नियमित सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में कारगर साबित हो रहे हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए पूरी दुनिया योग का भी सहारा ले रही है। योग द्वारा न केवल शरीर स्वस्थ्य रहता है बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ ही श्वसन तंत्र भी मजबूत होता है। रोजाना नियमित तौर पर योग के आसन करने से शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाएं यानी डब्लूबीसी ज्यादा तेजी से बनती हैं। यही कोशिकाएं बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती हैं जिससे हमारा इम्यून सिस्टम वायरस को खत्म करने की ताकत पाता है।
मनुष्य के भीतर विपरीत हालातों से निकलकर जीने की अद्भुत कला एवं क्षमता है। देश, मौसम और परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य ने समय- समय पर अपने रहन-सहन,खान-पान आदि में बदलाव कर जीवन जीने के नए-नए तरीके खोज निकाले हैं। वर्ष 1918 में फैला स्पेनिश फ्लू हो या दूसरा विश्व युद्ध या फिर हिरोशिमा अथवा नागासाकी में गिराए गए परमाणु बम। इतिहास गवाह है, मनुष्य ने खुद को हालातों से उबर कर जीवन जीने की नयी तकनीक और व्यवस्था का विकास किया है।

वर्तमान में कोरोना वायरस के रूप में एक नए तरीके के हालात पूरे विश्व में पैदा हो गए हैं जिसने हमारी जीवन शैली, काम-काज के तरीकों और सामाजिक सम्बन्धों को पूरी तरह बदल डाला है। आज सम्पूर्ण मानव जाति अपने जीवन पर आए संकट से न केवल लड़ रही है बल्कि आने वाले हालातों के लिए खुद को तैयार भी कर रही है। बेहतर जीवन पद्धति विकसित करने में भारतीय जीवन पद्धति, ध्यान, योग तथा आयुर्वेद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज कोरोना के खिलाफ उपचार में विभिन्न शोध और अनुसंधान का कार्य पूरे विश्व भर में चल रहा है उसमें भारतीय चिकित्सा पद्धति और योग को भी शामिल किए जाने की आवश्यकता है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने वक्तव्यों में इस तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश समय-समय पर की जाते रही है, जो प्रसंशनीय कही जा सकती है।

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