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कोरोना के दौर में क्या हाल हैं नैनीताल के ?

नैनीताल की खूबसूरती में चार चांद लगाती है वहां मौजूद नैनी झील। हमेशा सीजन के दिनों में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाली झील में आज सिर्फ पानी का उमड़ता-घुमड़ता शोर ही सुनाई दे रहा है,जो मन को शांति तो दे रहा है लेकिन जिस असली रूप के लिए ये झील जानी जाती है उसे न देखकर मन दुखी भी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही इंडिया और सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी से आज़ाद होगा और नैनीताल की यह झील फिर से सैलानियों को कभी समाप्त न होने वाले आनंद से सराबोर करे।

By Lokesh Bisht

देव भूमि उत्तराखंड की पावन भूमि पर बसे झीलों के शहर नैनीताल का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। यहां का सबसे मुख्य आकर्षण नैनी झील मानी जाती है। नैनीताल को “तालों मे नैनीताल बांकी सब तलैया” ऐसे ही नही कहा जाता। झील के बारे में बात करें तो इसकी खोज 1841 में सी.पी.बैरन ने की थी। इसकी लंबाई 1430 मीटर चौड़ाई 465 मीटर है,जबकि गहराई 16 से 26 मीटर बतायी जाती है। वहीं समुद्र तल से ऊंचाई 1937 मीटर आंकी गयी है। झील के चारों ओर ऊंचे-ऊंचे सात पहाड़ हैं। सबसे ऊंचा चायना पीक या नैना पीक है ।नैनीताल के ताल को त्रि ऋषि सरोवर भी कहा जाता है। बताते हैं कि जब ऋषि अत्री, ऋषि पुलसत्य और ऋषि पुलह को नैनीताल में कहीं पानी नही मिला तो उन्होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से पानी लाकर इसे भरा।

हमेशा सैलानियों को शीतलता प्रदान करने वाली झील, सदा इसकी गोद में जल क्रीड़ा करती नौकाएं हर किसी को अपने जीवन मे एक न एक बार इस आनंद को पाने के लिए आकर्षित करती हैं। लेकिन आज लॉकडाउन और कोरोना महामारी के चलते ये भी सैलानियों की बाट जोह रही है नावें टक-टकी लगाए किनारे को देख रही हैं, वो फिर से झील मे हिचकोले खाने को बेताब हैं। सन्नाटा इतना गहरा पसरा है कि छोटी सी भी हलचल साफ सुनाई दे रही है।

कहना होगा कि हमेशा सीज़न के वक्त लोगो से खचाखच भरी रहने वाली झील में आज सिर्फ पानी का उमड़ता-घुमड़ता शोर ही सुनाई दे रहा है,जो मन को शांति तो दे रहा है पर जिस असली रूप के लिए ये झील जानी जाती है उसे न देखकर मन दुखी भी है। सिर्फ यही आशा की जा सकती है कि जल्द ही भारत और समूची दुनिया कोरोना महामारी से आज़ाद हों। और नैनीताल की यह प्रसिद्ध झील फिर से सैलानियों को कभी समाप्त न होने वाले आनंद से सराबोर करे।

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