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पंजाब कांग्रेस में थम नहीं रहे ‘धमाके’

By Anil Azad Pandey

कांग्रेस पार्टी में आए दिन नए-नए धमाके हो रहे हैं। राजनीतिक पंडित भी मान चुके हैं कि कांग्रेस अपना अस्तित्व खोने के कगार पर है और लगातार गर्त में जा रही है। राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा पार्टी के तमाम दिग्गज असंतुष्टों को समझाने में देरी हो जाती है। इसके बाद वे इस्तीफे दे देते हैं। मध्य प्रदेश, यूपी व अन्य राज्यों में ऐसा हम देख चुके हैं। आजकल पंजाब का दौर चला है, जहां पहले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबी लड़ाई चली। करीब दो महीने पहले सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद दोनों गुटों में संघर्ष और तेज हो गया। जिसका पटाक्षेप हाल में कैप्टन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद हुआ।

इसके साथ ही पंजाब में दलित चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। जिसे कुछ जानकारों ने कांग्रेस का ट्रंप कार्ड करार दिया। क्योंकि राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं और पंजाब में दलितों की संख्या काफी है। इस बीच चन्नी के नेतृत्व में नई कैबिनेट का गठन किया जा रहा था, जिसमें सिद्धू के विरोधियों को तरजीह दी गयी, बस फिर क्या था सिद्धू ने तेवर दिखाने शुरु कर दिए। उन्होंने पार्टी आलाकमान को इस्तीफा सौंप दिया है। जबकि उन्हें मनाने के प्रयास जारी हैं, पर सिद्धू हैं कि पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। शायद वे पार्टी नेतृत्व को अपनी अहमियत इस संकट के वक्त में दिखाना चाहते हैं।

वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह लगभग कांग्रेस से किनारा कर चुके हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से दिल्ली में मुलाकात भी की है। ऐसे में वे बीजेपी का दामन थाम सकते हैं, इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने सिद्धू के बारे में ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने सिद्धू को “नॉट ए स्टेबल मैन” करार दिया

 

सिद्धू ने जारी किया वीडियो

इस दौरान पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद नवजोत सिद्धू ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि वे हक और सच की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे। बकौल सिद्धू उनकी किसी के साथ कोई व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता नहीं है। मेरा राजनीतिक करियर 17 साल का है, जो बदलाव लाने के लिए था। लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए था। यही मेरा धर्म है। सिद्धू ने कहा कि मैं न हाईकमान को गुमराह कर सकता, न गुमराह होने दे सकता हूं। इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ने के लिए, पंजाब के लोगों की जिंदगी को बेहतर करने के लिए मैं किसी भी चीज की कुर्बानी दे दूंगा।

चन्नी के नेतृत्व में बैठक जारी

उधर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की आपात बैठक जारी है। बैठक में सिद्धू को मनाने के लिए रणनीति बनायी जा रही है। हालांकि इस्तीफे के बाद से ही नवजोत सिद्धू अपने पटियाला स्थित निवास पर हैं। जबकि कांग्रेस हाईकमान सिद्धू का इस्तीफा खारिज कर चुका है। एक और बात सामने आयी है कि इस बार उन्हें दिल्ली से मनाए जाने की कोशिश नहीं हो रही है, बल्कि राज्य स्तर पर ही प्रयास किए जा रहे हैं।

लेकिन पंजाब के घटनाक्रम के बाद यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व व स्थानीय नेताओं के बीच संवाद और सामंजस्य के बेहद अभाव है। जिसके फलस्वरूप पार्टी के तमाम नेता बागी तेवर दिखाते रहे हैं। अब पंजाब के बाद राजस्थान पर नजर है, जहां सचिन पायलट व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे के बीच खींचतान खत्म नहीं हुई है।

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