कला संस्कृति देश दुनिया रोचक

एक अलग ही दुनिया होती है रंगों की, स्पेशल रिपोर्ट

आईसाक न्यूटन द्वारा की गयी खोज के अनुसार रंगों की उत्पत्ति का प्राकृतिक स्रोत सूर्य का प्रकाश होता है। सूर्य के प्रकाश से ही विभिन्न प्रकार के रंगों की उत्पत्ति होती है। प्रिज़्म की सहायता से देखने पर पता चलता है कि सूर्य के प्रकाश में सात प्रमुख रंग होते हैं, जिसे हम VIBGYOR से समझते हैं। ये रंग वायलेट यानी बैंगनी, इंडिगो-गहरा नीला ( जामुनी ), ब्लू-नीला, ग्रीन-हरा, येलो -पीला, ऑरेंज-नारंगी और रेड लाल रंग होते हैं।
By Khajan Pande, Delhi
प्रकृति की सुन्दरता अवर्णनीय है और इसकी सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं इसके खूबसूरत रंग। उगते सूरज की लालिमा हो या आसमान का नीलापन,खेतों की हरियाली हो या बगीचे में खिले फूल। बर्फ की सफ़ेद चादर हो या बारिश के बाद इन्द्रधनुष की छठा, कई अनगिनत खूबसूरत नज़ारे जो हमने अपने जीवन में देखे हैं। उनके बगैर लाइफ़ की कल्पना करना संभव नहीं है। रंग हमारे जीवन में एक अनुभव की तरह हमेशा हमारे साथ, हमारे आस-पास के वातावरण में मौजूद रहते हैं। हम सभी इसके प्रभावों को अपने जीवन में, रहन-सहन में, रोजमर्रा के व्यवहार में, ख़ुशी में, शोक में हर जगह महसूस करते रहते हैं।
हम क्या पहनेंगे, कहां घूमने जाएंगे, कैसे अपने घर को सजाएंगे, इन सबा बातों के बारे में हम अक्सर सचेत भी नहीं होते। जबकि असल में ये सब हमारे भीतरी मन के रंगों की अभिव्यक्ति होते हैं। रंगों की अनुभूति हमारी भावनाओं के प्रफुल्लित-दुःखी, उत्साहित-उदासीन, सक्रिय-निष्क्रिय, शान्त-अशान्त होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह कहा जा सकता है कि रंग न केवल हमारे शारीरिक बल्कि हमारे ऊपर भावनात्मक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी डालते हैं।

आईसाक न्यूटन द्वारा की गयी खोज के अनुसार रंगों की उत्पत्ति का प्राकृतिक स्रोत सूर्य का प्रकाश होता है। सूर्य के प्रकाश से ही विभिन्न प्रकार के रंगों की उत्पत्ति होती है। प्रिज़्म की सहायता से देखने पर पता चलता है कि सूर्य के प्रकाश में सात प्रमुख रंग होते हैं, जिसे हम VIBGYOR से समझते हैं।

ये रंग वायलेट यानी बैंगनी, इंडिगो-गहरा नीला ( जामुनी ), ब्लू -नीला, ग्रीन-हरा, येलो -पीला, ऑरेंज-नारंगी और रेड लाल रंग होते हैं। उनके प्रयोगों से पता चला है कि प्रकाश या ऊर्जा तरंग के रूप में वातावरण में घूमती रहती है। प्रत्येक तरंग की एक लंबाई होती है जिसे हम तरंगदैर्ध्य कहते हैं। तरंगें एक निश्चित गति से यात्रा करती हैं, जिसे सेकेंड या मिलीसेकेंड में मापा जा सकता है। एक समय अंतराल में वह जितनी बार अपने को दोहराती हैं वह उस तरंग की आवृत्ति होती है। कोई भी ऊर्जा तरंग दैर्ध्य या आवृत्ति द्वारा विश्लेषित हो सकती है। तरंग दैर्ध्य जितनी अधिक होगी उतनी ही कम उस तरंग की आवृत्ति होगी। रंगों में सबसे लंबी तरंगदैर्ध्य और सबसे कम आवृत्ति वाला रंग लाल माना जाता है। जबकि सबसे कम तरंग दैर्ध्य और उच्चतम आवृत्ति वाला रंग बैंगनी होता है।

क्योंकि रंग ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत होता है जो तरंगों के माध्यम से प्रदर्शित होता है। इसलिए हमारे जीवन को भी यह सकारात्मक और नकारात्मक रूप में प्रभावित करता रहता है। रंगों के प्रभाव और समानता के आधार पर VIBGYOR रंगों को तीन हिस्सों में बांटा गया है।

गर्म रंग- लाल, नारंगी और पीले रंग को गर्म रंग के नाम से जाना जाता है। इनका मुख्य कारण इन रंगों का गर्म स्वभाव और स्फूर्तिदायक होना है। ये रंग मानसिक शक्ति, बुद्धि, साहस और महत्वाकांक्षा को भी बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं।
लाल रंग- सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य होने के नाते, लाल एक शक्तिशाली रंग है। यह पौरूष और आत्मगौरव को प्रकट करता है। लाल शौर्य एवं विजय का प्रतीक भी होता है। हिन्दू धर्म में विवाह, जन्म, विभिन्न उत्सवों पर खुशी-आनंद की भावना लाल रंग से प्रकट की जाती है। तीज-त्योहारों,मांगलिक शुभ कार्यों में लाल टीका लगाने की परम्परा प्राचीन  समय से ही चली आ रही है। इसी प्रकार देवी-देवताओं की प्रतिमा पर लाल रोली का टीका लगाया जाता है । इसे सौंदर्य का प्रतीक भी माना गया है।
नारी की मांग में लाल सिन्दूर जहां उसका सौंदर्य बढ़ाता है वहीं उसके सौभाग्यशाली होने को भी प्रदर्शित करता है । हमारे खून का रंग भी लाल है, जिससे जिसके द्वारा हमें जीवन और शक्ति  प्रदान होती है । शक्ति के स्वरूप बजरंग बलि जी का प्रतीकात्मक रंग भी लाल ही है।

लाल रंग मूलाधार चक्र से सम्बंधित है। मूलाधार चक्र मानव शरीर का प्रथम चक्र माना जाता है। यह गुदा और लिंग के बीच यानी की रीड की हड्डी के आधार पर स्थित होता है। इसीलिए इसे आधार चक्र भी कहते हैं।इस चक्र का मंत्र ‘लं’ है, जिसे चार पंखुड़ियों वाले फूल के रूप में दिखाया जाता है। शरीर में यह किडनी और मूत्राशय से सम्बंधित है। मूलाधार चक्र के संतुलित होने से व्यक्ति में चेतना, जागरूकता आती है। इससे व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जागृत होता है।

नारंगी रंग- यह त्याग, तपस्या और वैराग्य का रंग माना जाता है । भारतीय धर्म में इस रंग को साधुता, पवित्रता, स्वच्छता और परिष्कार का द्योतक माना गया है। इस रंग को पहनने वाले अपनी वासनाओं पर नियंत्रण पाकर आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होते हैं । यह आध्यात्मिकता का प्रतीक है। यह धार्मिक ज्ञान, तप और संयम का रंग है । यह रंग शुभ संकल्प का सूचक है । यह रंग पहनने वाला अपने कर्तव्य और नैतिक उन्नति के प्रति हमेशा सजक और दृढ़ संकल्पित रहता  है।

नारंगी रंग स्वाधिष्ठान चक्र से सम्बंधित है। स्वाधिष्ठान चक्र मानव शरीर का दूसरा चक्र है। इस चक्र का मंत्र ‘वं’ है जिसे छह पंखुड़ियों वाले फूल की तरह दर्शाया जाता है। मानव शरीर में यह चक्र रीड की हड्डी के तल में नाभि केंद्र के बीच स्थित होता है। इस चक्र को धार्मिक चक्र भी कहते हैं । यह चक्र व्यक्ति को नकारात्मकता से दूर करता है। यह चक्र व्यक्ति के स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है।

पीला रंग- यह रंग ज्ञान,विद्या, शांति, एकाग्रता और मानसिक तथा बौद्धिक उन्नति का प्रतीक है। क्योकि यह सूर्य का रंग है इसलिए यह रंग ताजगी, शुद्धता और ऊर्जा का रंग है।  यह हमारे मन और मस्तिष्क को प्रफुल्लित करता है इसलिए यह बच्चों का सबसे पसंदीदा रंग है। किसी भी सुबह कार्य में लाल रंग के साथ पीला वस्त्र और कुमकुम को भी अनिवार्य एवं आवश्यक माना गया है। बसंत ऋतु  में पेड़-पौधों में सबसे अधिक मात्रा में खिलने वाला फूल भी पीला ही है इसलिए इसे नव जीवन में प्राण-संचार का रंग भी कहा जा सकता है।


पीला रंग मणिपुर चक्र से सम्बंधित है। मणिपुर चक्र मानव शरीर का तीसरा चक्र होता है जिसे नाभि चक्र भी कहते हैं। मणिपुर चक्र का मंत्र ‘रं’ है और यह 10 पंखुड़ियों वाले फूल के रूप में दर्शाया जाता है। मानव शरीर में यह चक्र नाभि केंद्र के बीच स्थित होता है। यह चक्र ज्ञान बुद्धि आत्मविश्वास तथा निर्णय लेने की क्षमता को जन्म देता है।

हरा रंग- हरा रंग एक तटस्थ रंग है और आंखों के लिए आरामदायक होता है। इस रंग की प्रकृति सामंजस्यपूर्ण है और यह मन को शांत और खुश रखने में मदद करती है।यह रंग प्रकृति में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है । हम सभी जानते हैं कि हरे पत्ते कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।हमें प्राप्त होने वाले अनाज के पौधों का रंग भी हरा होता है जो जीवन दायनी  के रूप में है। हरे रंग को धार्मिक अनुष्ठानों में रुचि बढ़ाने के लिए भी देखा जाता है। इस रंग को समृद्धि के रंग के रूप में भी देखा जाता है।

हरा रंग अनाहत चक्र से सम्बंधित है। अनाहत चक्र मानव शरीर का चौथा चक्र होता है। इस चक्र का मंत्र ‘यं’ हैऔर यह बारह पंखुड़ियों वाले कमल के फूल के रूप में दर्शाया जाता है। मानव शरीर में यह चक्र छाती के मध्य में स्थित होता है। जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने तथा भावनाओं को नियंत्रित रखने में यह रंग लाभकारी है। प्यार-स्नेह को बढ़ाने में भी यह रंग सहायक है।
ठन्डे रंग- नीला, गहरे नीले( जामुनी) और बैंगनी रंग को ठन्डे कलर के रूप में रूप में जाना जाता है। आमतौर पर ये रंग दिमाग में सुखदायक प्रभाव डालते हैं। ये रंग चिंता से दूर करने का कार्य करते हैं और मन मैं शांति की अनुभूति प्रदान करते हैं।  शांति के प्रतीक ये रंग आध्यात्मिक विकास, ध्यान , भक्ति, विश्वास, सच्चाई और उच्च आकांक्षाओं की खोज में मददगार साबित होते हैं।
नीला रंग- नीला रंग मन का रंग है और अनिवार्य रूप से सुखदायक है। यह हमें मानसिक रूप से प्रभावित करता है। यह एक शांत रंग है जो मानसिक शांति प्रदान करता है।एकाग्रता को बढ़ाने में इससे सहायता प्रदान होती है। इस रंग का प्रभाव स्थिर है जो पाचन और एकजुटता में मदद करता है।  एक शोध के अनुसार दुनिया मैं यह सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला रंग है। भगवान् श्री राम , श्री कृष्ण के अलावा कई देवताओं का रंग भी नीला है।भगवान शिव द्वारा नीले रंग का विष अपने कंठ में धारण करने के बाद से उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है.

नीला रंग विशुद्ध चक्र से सम्बंधित है। विशुद्ध चक्र मानव शरीर का पांचवा चक्र होता है। इस चक्र का मंत्र ‘‘हं’ है और यह सोलह पंखुड़ियों वाले  फूल  के रूप में दर्शाया जाता है। मानव शरीर में यह चक्र कंठ में स्थित होता है। इस चक्र में असंतुलन से  पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है। इस चक्र का सम्बन्ध सक्रियता से है।

गहरा नीला ( जामुनी )- गहरा नीला रंग जिसे हम जामुनी रंग से भी जानते हैं, आत्मिक ज्ञान और धारणा का रंग है। यह आत्मनिरीक्षण और ध्यान के समय के दौरान एकाग्रता को बढ़ावा देता है। यह  रंग निष्पक्षता के साथ ज्ञान और न्याय को दर्शाता है। यह रंग दया और आंतरिक शांति की श्रेष्ठ स्थिति को दर्शाता है। यह रक्त प्रवाह को शुद्ध करने कार्य करता है।  मानसिक समस्याओं से निजात पाने में भी यह रंग मददगार साबित होता है।

गहरा नीला रंग (जामुनी रंग ) अजना चक्र से सम्बंधित है। अजना चक्र मानव शरीर का छठा चक्र होता है। इस चक्र का मंत्र ‘उ’ है,  जिसे दो पंखुड़ियों के रूप में दर्शाया जाता है।  मानव शरीर में यह चक्र दोनों आंखों के मध्य में स्थित होता है। इस चक्कर से अध्यात्मिक जागरूकता, आत्मचिंतन तथा स्पष्ट विचार की प्राप्ति होती है।

बैंगनी- सबसे छोटी तरंग दैर्ध्य बैंगनी है। यह सर्वोच्च आकांक्षा और ब्रह्मांड का रंग है। यह आध्यात्मिक मूल्यों के क्षेत्र में जागरूकता को उच्च स्तर तक ले जाता है। यह अत्यधिक अंतर्मुखी है और गहन चिंतन, या ध्यान को प्रोत्साहित करता है। यह रंग शरीर में विश्राम लाता है और मानसिक केंद्रों  तथा तंत्रिका तंत्र में सूक्ष्म ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है।

बैंगनी रंग सहस्र चक्र से सम्बंधित है। सहस्र चक्र मानव शरीर का सातवां चक्र होता है। इस चक्र का मंत्र  ‘ॐ’ है,  जिसे अनेकों पंखुड़ियों वाले फूल के रूप में दर्शाया जाता है।  मानव शरीर में यह चक्र सिर के ऊपर शीर्ष स्थान में स्थित होता है। यह चक्र जागरूकता के साथ व्यक्ति की बुद्धि और परमात्मा के मिलान का प्रतिनिधित्व करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *