साहित्य

कभी छोड़ा मैंने, जो मेरा प्यारा गाँव…

By Harish कभी छोड़ा मैंने जो मेरा प्यारा गाँव जिसकी तलाश में सरे राह अनगिनत छालों से भरे मेरे पाँव, दो रोटी का गुजारा करने मैं शहर चला आया रात दिन काम किया खुद को अकेला पाया और खुद को मेहनतकश मजदूर बनाया, कभी हम घर में मजे से रहा करते थे आज घर का […]

साहित्य

रोको मत, इस चिलचिलाती धूप में उनको…

By G D Pandey रोको मत, इस चिलचिलाती धूप में उनको . करो व्यवस्था दुरुस्त, पहुंचाने उनके गांव तक उनको कहां है व्यवस्था रेलगाड़ियां और बसें चलाओ उनको जल्दी करो मत टूटने दो मजदूरों के सब्र को और अधिक मत गर्म करो उनके क्रांतिकारी खून को. विपदा की तपन से बाहर निकाल दो उनको. रोको […]