साहित्य

हे मातृ भूमि तुझको नमन !

Jai Krishna Pandey ‘Krishna’ हे मातृ भूमि तुझको नमन । जन्म जहाँ हमने लिया, सदा इसी के हैं संतान । अन्न ग्रहण जहाँ किया, सदा जहाँ निवास है । माँ हम हैं तुम में ही बसे, तुझमें ही कर रहे रमन ।।1।। हे मातृ भूमि तुझको नमन । स्नेह है तुमने दिया, प्रेम है तेरे […]

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हाँ! मैं एक फौजी हूँ

By Harish हाँ! मैं एक फौजी हूँ, सब कहते हैं मनमौजी हूँ,, बचपन से मैंने देखे सपने सपने वो जो आपने देखे मैंने देखे हम सबने देखे, सपना वो जिसे मैंने जीना सीखा शरहद पर लड़ पाऊँ दुश्मनों के छक्के छुड़ाऊँ एक दिन वतन के काम आऊँ इसलिए अपनी उमड़ती थकान को पीना सीखा, माँ-बाप […]

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जन से खिलवाड़…

By C.S Karki  मत करो ऐसी कोशिश कि इन्सान को यन्त्र बना डालो। संवेदनायें खत्म कर उसकी निष्ठुर, जड़ पुतला बना दो।। यह जरूरी नहीं कि तुम्हारे इशारों पर वह बोले साधे हित तुम्हारा परछाई बन रोबोट हो ले। कभी तुम उसे भगवान बनाओ और कभी निर्लिप्त सन्त कह दो।। बनाना चाहते हो समुन्दर कभी […]

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आओ मनाए मिलकर जश्न आजादी का…

By Harish आओ मनाए मिलकर जश्न आजादी का जश्न तिरंगे को सम्मान, स्वाभिमान व गौरव दिलाने का, कल तक जो थे गुलाम न थी आज़ादी और न ही स्वाभिमान से जीने देते आज देखो कैसे बढ़े कदम खुद को, देश को, इस धरा को गुलामी से निजात दिलाने को, कभी इन्होंने हमें जानवर समझा हमें […]

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भाभी और ननद के बीच आई सोने की चेन …

कहानी रिश्तों की पहचान:  By Hema Kabdal, Delhi  विमला शादी के बाद मुंबई में अपने पति के साथ रहती थी । उसके साथ उसके सास, ससुर, ननद और दो छोटे बच्चे भी रहते थे। विमला अक्सर घर के कामों में व्यस्त रहती थी और उसके पति ऑफिस के कामों में । सारे घर के लोग […]

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मेरा होम क्वारंटीन

By Harish  मैं जब से घर पहुँचा हूँ दूर हूँ सबसे, जिन्हें मिलने को मैं तरसता था न जाने कब से,, यह ठीक भी है बात कुछ दिनों की तो है फिर मिलना भी होगा, हम सबके ठहाकों के बीच बातों का सिलसिला भी होगा,, पहले जब भी मैं घर आता घर-घर जाकर सबसे मिल […]

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कहानी:  हिमांशी, हरेला और मेघा

By G D Pandey हिमांशी अपने मम्मी पापा की इकलौती बिटिया है। उसकी उम्र सात वर्ष है। वह एक पब्लिक स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ती है। दिल्ली में उसके पापा एक प्राइवेट कम्पनी में एकाउंटैन्ट हैं और उसकी मम्मी हाउस वाइफ हैं। हिमांशी बहुत होशियार एवं जिज्ञासु बच्ची है। वह नर्सरी, यूकेजी तथा पहली […]

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कुछ ऐसा वह भयावह दिन था…

by Harish  कुछ ऐसा वह भयावह दिन था तूफ़ाँ बन आई थी जब वो नदियां, जिन्हें हम माँ का दर्जा देते थे पूजा भी हम इनकी करते थे, कुछ ऐसा बरस पड़ी माँ तब शांत- स्वच्छ निर्मल पावन सी थी जो आज क्यों ऐसी क्रोधित हो आई, भू की तृष्णा मिटाती थी सींचा जिसने इस […]

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आज नया फ़ोन ख़रीदा, सोच में हूँ

By Dr. Anita Sharma, Shanghai आज नया फ़ोन ख़रीदा सोच में हूँ क्या करूँ इसका ? पुराना फ़ोन छः साल में हमदम की तरह हो गया है। सब जानता है मेरे बारे में किस-किस से बात होती है किससे ज़्यादा किससे कम बात होती है कौन मेरे फ़ोन का बेसब्री से इंतज़ार करता है एक […]

happy father's day
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वो मेरे पिता हैं, वो मेरे आदर्श हैं

By Harish वो मेरे पिता हैं वो मेरे आदर्श हैं । वो मुझे एक दोस्त की भाँति समय समय पर अच्छे बुरे का आभास भी कराते, और मैं जीवन पथ पर आगे बढ़ सकूँ जिसके लिए वे मेरा हौंसला भी बढ़ाते। वो मेरे पिता हैं वो मेरे आदर्श हैं। वो मार्गदर्शक भी हैं गुण अवगुण […]