साहित्य

भाभी और ननद के बीच आई सोने की चेन …

कहानी रिश्तों की पहचान:  By Hema Kabdal, Delhi  विमला शादी के बाद मुंबई में अपने पति के साथ रहती थी । उसके साथ उसके सास, ससुर, ननद और दो छोटे बच्चे भी रहते थे। विमला अक्सर घर के कामों में व्यस्त रहती थी और उसके पति ऑफिस के कामों में । सारे घर के लोग […]

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मेरा होम क्वारंटीन

By Harish  मैं जब से घर पहुँचा हूँ दूर हूँ सबसे, जिन्हें मिलने को मैं तरसता था न जाने कब से,, यह ठीक भी है बात कुछ दिनों की तो है फिर मिलना भी होगा, हम सबके ठहाकों के बीच बातों का सिलसिला भी होगा,, पहले जब भी मैं घर आता घर-घर जाकर सबसे मिल […]

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कहानी:  हिमांशी, हरेला और मेघा

By G D Pandey हिमांशी अपने मम्मी पापा की इकलौती बिटिया है। उसकी उम्र सात वर्ष है। वह एक पब्लिक स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ती है। दिल्ली में उसके पापा एक प्राइवेट कम्पनी में एकाउंटैन्ट हैं और उसकी मम्मी हाउस वाइफ हैं। हिमांशी बहुत होशियार एवं जिज्ञासु बच्ची है। वह नर्सरी, यूकेजी तथा पहली […]

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कुछ ऐसा वह भयावह दिन था…

by Harish  कुछ ऐसा वह भयावह दिन था तूफ़ाँ बन आई थी जब वो नदियां, जिन्हें हम माँ का दर्जा देते थे पूजा भी हम इनकी करते थे, कुछ ऐसा बरस पड़ी माँ तब शांत- स्वच्छ निर्मल पावन सी थी जो आज क्यों ऐसी क्रोधित हो आई, भू की तृष्णा मिटाती थी सींचा जिसने इस […]

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आज नया फ़ोन ख़रीदा, सोच में हूँ

By Dr. Anita Sharma, Shanghai आज नया फ़ोन ख़रीदा सोच में हूँ क्या करूँ इसका ? पुराना फ़ोन छः साल में हमदम की तरह हो गया है। सब जानता है मेरे बारे में किस-किस से बात होती है किससे ज़्यादा किससे कम बात होती है कौन मेरे फ़ोन का बेसब्री से इंतज़ार करता है एक […]

happy father's day
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वो मेरे पिता हैं, वो मेरे आदर्श हैं

By Harish वो मेरे पिता हैं वो मेरे आदर्श हैं । वो मुझे एक दोस्त की भाँति समय समय पर अच्छे बुरे का आभास भी कराते, और मैं जीवन पथ पर आगे बढ़ सकूँ जिसके लिए वे मेरा हौंसला भी बढ़ाते। वो मेरे पिता हैं वो मेरे आदर्श हैं। वो मार्गदर्शक भी हैं गुण अवगुण […]

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 पंचगव्य…वेदों में है वर्णन जिसका…

पंचगव्य का वर्णन वेदों में भी मिलता है। गांव में इसका उपयोग धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में होता है। पांच पदार्थों के मिश्रण  से बनाया जाने वाले पंचगव्य को अब दवा  भी माना जा रहा है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यह कोरोना के इलाज में काम आएगा। राजकोट के कामधेनु संस्थान […]

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कभी छोड़ा मैंने, जो मेरा प्यारा गाँव…

By Harish कभी छोड़ा मैंने जो मेरा प्यारा गाँव जिसकी तलाश में सरे राह अनगिनत छालों से भरे मेरे पाँव, दो रोटी का गुजारा करने मैं शहर चला आया रात दिन काम किया खुद को अकेला पाया और खुद को मेहनतकश मजदूर बनाया, कभी हम घर में मजे से रहा करते थे आज घर का […]

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रोको मत, इस चिलचिलाती धूप में उनको…

By G D Pandey रोको मत, इस चिलचिलाती धूप में उनको . करो व्यवस्था दुरुस्त, पहुंचाने उनके गांव तक उनको कहां है व्यवस्था रेलगाड़ियां और बसें चलाओ उनको जल्दी करो मत टूटने दो मजदूरों के सब्र को और अधिक मत गर्म करो उनके क्रांतिकारी खून को. विपदा की तपन से बाहर निकाल दो उनको. रोको […]