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विदेशी भाषा अंग्रेजी की हर स्तर पर वर्चस्व की भूल को भी सुधार दो

लौह पुरुष पटेल जी बने होते प्रधानमंत्री तो विविध भाषा बोली की रियासतों की तरह मानसिक आजादी भी मिल जाती: धामी न्यायालय में फैसलों में भी विदेशी भाषा का वर्चस्व समाप्त हो रवींद्र सिंह धामी  खटीमा। विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व भारतीय संस्कृति, इतिहास, जीवन दर्शन को नष्ट कर हमारे स्वाभिमान, गौरव एवं आस्था को […]

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उत्तराखंड में बेरोजगार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार हेतु संगठित करने की कवायद और उसकी दिशा

By GD Pandey 24 मार्च 2020 को देशव्यापी लाकडाउन की घोषणा के साथ ही भारत के करोड़ों मजदूरों खासकर प्रवासी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों में हा हाकार मच गया। लाकडाउन के पहले चरण को तो अधिकांश कामगारों ने इस उम्मीद के साथ येन केन प्रकारेण झेला कि लाकडाउन खुलने पर उन्हें उनका काम […]

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चुनावी घोषणा पत्र में जगह पाने लगा है मातृभाषा को बढ़ावा

रवींद्र सिंह धामी की फेसबुक वॉल से देश भर के भाषा समर्थकों को प्रणाम। भाषा आंदोलनकारी हर स्तर पर अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की मांग निरन्तर उठा रहे हैं। बीते दिनों प्रधानमंत्री के नाम पर खुला पत्र जारी कर भारतीय संस्कृति की वाहक भारतीय भाषाई अस्मिता के संघर्ष को […]

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जो सत्ता जनता की भाषा में कार्य नहीं करा पाए, वह मानसिक गुलाम और जनविरोधी : धामी

भाषा आंदोलन के राष्ट्रीय सचिव का प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र बोले, अपनी भाषाओं का सम्मान हो  By Naveen Joshi खटीमा। भाषा आंदोलन संगठन के राष्ट्रीय सचिव रवींद्र सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र भेजकर अपनी भाषा नीति में बदलाव कर राष्ट्रीय स्वाभिमान को स्थान देने और भारतीय भाषाओं में केंद्रीय परीक्षाओं […]

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भाषा आंदोलन को मीडिया के प्रमुख भी मानते रहे हैं अपना, समर्थन ही नहीं सक्रिय साथ

रवींद्र सिंह धामी की फेसबुक वॉल से संघर्ष के पल..भाषा आंदोलन में देश के प्रमुख अखबारों के अपनों का समर्थन…सनातन संस्कृति की वाहक भारतीय भाषाओं के खिलाफ अँग्रेजियत की साजिश के खिलाफ संघर्ष में वर्ष 1990 से 1998 तक तत्कालीन तब के प्रमुख अखबारों के सम्पादक, संवाददाता अपना संघर्ष मानते थे। उनकी सक्रिय भागीदारी जब […]

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भारतीय संस्कृति व भाषाई अस्मिता के संघर्ष को फिर जुटे पुराने साथी, बोले-तैयारी शुरू

रवींद्र सिंह धामी की फेसबुक वॉल से भारतीय संस्कृति की वाहक भारतीय भाषाओं के खिलाफ अंग्रेजियत के षड्यंत्र, अंग्रेजी की हर स्तर पर अनिवार्यता को खत्म करने, मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा व भारतीयता के संघर्ष भाषा आंदोलन के 1990 से 1999 तक अखिल भारतीय भाषा संरक्षण संगठन के बैनर तले पूरे विपक्ष के नेताओं को […]

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उत्तराखंड, संघर्ष एवं प्रतिफल

By CS Karki वर्षों के संघर्षों का प्रतिफल उत्तराखण्ड राज्य नौ नवम्बर २०२० को दो दशक पूरा कर चुका होगा। इतने समय में कई सरकारें आई और गई। पहाड़ वासियों के असंख्य सपने नित बनते, बसते साकार होते से लगे, आशाओं और आकांक्षाओं के बीच लंबी संघर्ष यात्रा में असंख्य बलिदानों एवं त्याग की स्मृतियां, […]

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केंद्रीय मंत्री पासवान के निधन से भाषा संगठन को अपूर्णीय क्षति

रवीन्द्र सिंह धामी की फेसबुक वॉल से भाषा आंदोलन के समर्थक केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन से भाषा संगठन को अपूर्णीय क्षति हुई है। पासवान जी देश में अँग्रेजियत के खिलाफ संघर्ष में अंग्रेजी की हर स्तर पर मानसिक गुलामी से आजादी के लिए वर्ष 1994 में संघ लोक सेवा आयोग के समक्ष […]

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सोरघाटी का भू-वैज्ञानिक- प्रो. खड़ग सिंह वल्दिया

By CS Karki प्रकृति, पहाड़, पत्थर और धूल से दोस्ती करते-करते औसत आदमी की उबड़-खाबड जिन्दगी से तालमेल बैठाने वाले असाधारण व्यक्तित्व जो घुप अंधेरे धरती के अंदर दबे पड़े रोशन चमक को आजीवन खोजते रहे, आम जीवन के कष्टों को भांपते हुए धरती के गर्भ की पड़ताल में दुनिया को चेताते रहे कि धरती […]

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महात्मा गांधी की सर्वोदयी और सविनय अवज्ञा की अवधारणा का स्रोत और 1942 की अगस्त क्रान्ति में उसका प्रभाव

By G D Pandey हमारे देश में 2 अक्टूबर का दिन गांधी जयन्ती और लाल बाहदुर शास्त्री की जयंती का प्रतीक है। प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को देश भर में भव्य कार्यक्रमों के जरिए गांधी विचारधारा के विभिन्न पहलुओं का बखान किया जाता है। राजनेताओं द्वारा भारत के शोषित उत्पीड़ित तथा वंचित जन समुदाय को गांधी […]