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हल्द्वानी के बोल और दून के संगीत से सजी बिग बी की ‘गुलाबो सिताबो’

By Lokesh Singh

हल्द्वानी। अगले महीने की 12 तारीख को ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली फिल्म  ‘गुलाबो सिताबो’ का लखनऊ ही नहीं दून और हल्द्वानी से भी कनेक्शन है। महानायक अमिताभ बच्चन और बॉलीवुड की हिट मशीन आयुष्मान खुराना की अदाकारी से सजी इस फिल्म के तीन गाने हल्द्वानी के दिनेश पंत ने लिखे हैं, जबकि इन गीतों को अपने संगीत से पिरोया है देहरादून के अनुज गर्ग ने। कोरोना काल में इस फिल्म के टॉकीज में रिलीज होने की जल्द संभावना नजर नहीं आने पर इसे अमेजन प्राइम पर रिलीज किया जा रहा है और  ट्रेलर भी जारी हो गया। इसके संगीत को बुहत पसंद किया जा रहा है।

दिनेश पंत ने बताया कि उन्हें बचपन से ही लिखने का शौक था। इसी शौक ने पहले उन्हें पत्रकार बनाया फिर गीतकार। पत्रकार के तौर राजस्थान में काफी समय तक काम किया, वर्तमान में हल्द्वानी में एक कंपनी में ट्रेनिंग ऑफिसर हैं। ‘गुलाबो सिताबो’  फिल्म के बारे में पूछे जाने पर दिनेश का चेहरा खिल जाता है और कहते हैं कि यह मेरा सौभाग्य है कि महानायक अमिताभ बच्चन जिस फिल्म में हैं, उसके गीत लिखने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी में
ही पांच माह में इन गानों को लिखा। वहीं इन गानों को अपने संगीत की चाशनी में डुबोने वाले अनुज गर्ग ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि तीनों ही गाने प्रेरणादायी हैं। उन्होंने गानों में फिल्म के डायरेक्टर शूजित सिरकर के विजन को पूरा करने की पूरी कोशिश की है। अनुज ने बताया कि दिनेश के तीनों गानों को उन्होंने ही संगीत दिया है। वहीं गानों को उत्तराखंड के बॉबी कैश, टोची रैना और भवरी देवी ने अपनी आवाज दी है। वहीं एक गाना उन्होंने खुद गाया है।

पूरा परिवार संगीत का पुजारी

अनुज गर्ग ने बताया कि उनकी पत्नी दीक्षा सती गर्ग संगीत की शिक्षिका हैं। उन्हें भी गाने का बहुत शौक है। बताया कि बीते वर्ष मातृ दिवस पर उन्होंने ‘मेरी रोटी की गोलाई मां…’ गाना बनाया था, जिसे अमिताभ बच्चन और उनके बेटे यजत गर्ग ने अपनी आवाज दी थी। उन्होंने बताया कि संगीत के क्षेत्र में आने के लिए उन्हें उनके बड़े भाई अशोक गर्ग ने प्रेरित किया था। इसके अलावा
उनकी बेटी आगमा गर्ग को भी संगीत बहुत पसंद है। वहीं दिनेश के परिवार में मां, बहन, पत्नी और दो बच्चे हैं।

लॉकडाउन : बड़े परदे पर फिल्म रिलीज होती तो अच्छा होता

दिनेश पंत कहते हैं कि फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म पर करीब 200 से अधिक देशों में रिलीज हो रही है लेकिन उन्हें मलाल है कि लॉकडाउन के कारण फिल्म बड़े परदे पर रिलीज नहीं हो पाई। अनुज और दिनेश दोनों का ही कहना है कि निर्माता हमेशा थियेटर के लिए ही फिल्में बनाता है लेकिन वर्तमान हालात में इसे बड़े पर्दे पर रिलीज करना संभव नहीं था। उनका कहना है कि ओटीटी प्लेटफार्म पर फिल्म रिलीज करना मजबूरी भी है और जरूरी भी, क्योंकि रिलीज रोककर संगीत पुराना हो जाता है और दर्शक रोजाना कुछ नया चाहते हैं।

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