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आंवला रोकेगा कोरोना का खतरा, बढ़ाता है इम्यूनिटी..

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

कोरोनावायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में के अब तक 153,517 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 5,735 लोगों की जान जा चुकी है। । वहीं भारत में भी लगातार बढ़ती कोरोना के मरीजों की संख्या ने सरकार और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कर्नाटक में कोरोना से एक व्यक्ति की मौत के बाद अब दिल्ली में  इस वायरस ने अपना दूसरा शिकार किया है। जिसके बाद इस वायरस से मरने वालों की संख्या दो हो गई है। इम्यूनिटी मजबूत होने पर कोरोना के खतरे से बचा जा सकता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में आंवला भी गुणकारी माना गया है।
आंवला रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह कोरोना वायरस का खतरा भी कम कर सकता है। औषधीय गुणों से आंवले को अमलाकी भी कहते हैं। प्राचीन काल से आयुर्वेद में आंवले का प्रयोग किया जा रहा है। आंवला एक इंडियन सूपरफूड के तौर पर भी जाना जाता है। यह कई स्वास्थ्य समस्याओं जैसे. त्वचा, बालों, पेट की समस्या, हृदय रोग, लिवर संबंधी बीमारियों से बचाने के साथ यह रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है। दुनियाभर में फैले संक्रमण के बीच आंवला और इससे बने उत्पादों का सेवन आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

इसके पोषक तत्वों की बात करें तो आंवला पॉलीफेनोल, विटामिन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन से युक्त होता है। जो बच्चों, महिलाओं, वयस्कों, और अधिक उम्र के लोगों के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। इन फायदों को जानने के बाद अगर आप अपने आहार में आंवले को शामिल करना चाहते हैं इसके लिए आपको आंवला, पुदीना, धनिया, लहसुन, मिर्च, नमक, चीनी को आवश्याकतानुसार लेकर चटनी तैयार कर सकते हैं ।

प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों का एक विशाल और संगठित नेटवर्क है जो कीटाणुओं, वायरस और सूक्ष्मजीवों से शरीर की रक्षा करता है। यह संक्रमण को रोककर आपके शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना वायरस कमजोर और बुजुर्ग लोगों को जल्दी अपना शिकार बनाता है । आंवला के अलावा लहसुन, तुलसी,काली मिर्च और शहद भी इम्यूनिटी सिस्टम को बूस्ट करने काम करता है।अंगूर, ब्लू बेरीज, क्रैनबेरीज, स्ट्रॉबेरीज, कोकोआ, डार्क चॉकलेट जैसी खाने की चीजें फंगल इंफेक्शन के मामले में असरदार हैं।

लेखक उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर कार्य कर चुके हैं, वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरत  हैं ।

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