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अल्मोड़ा की सौम्या ने ब्रिटेन में दिखाया दम, पहाड़ी संस्कृति की झलक पेश कर जीता सबका दिल

मिसेज यूके इंडिया 2019 प्रतियोगिता में जीता पर्सनेलिटी ऑफ द ईयर का खिताब  

पर्यावरण को बचाने के प्रयास में जुटी हैं सौम्या

By Anil Azad pandey, Beijing, China 

 चीन के महान क्रांतिकारी नेता माओ त्सेतुंग ने कहा था कि, आधा आसमान महिलाओं का है (Women hold up half the sky) । आज जब हम महिलाओं को तमाम क्षेत्रों में बुलंदियों को छूते हुए देखते हैं तो लगता है कि महिलाएं आधे नहीं बल्कि पूरे आसमान को पाने की हक़दार हैं। जब-जब भी महिलाओं को मौके मिले हैं उन्होंने वो कर दिखाया है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। अंतरिक्ष में पहुंचने या फिर फाइटर जेट चलाने जैसे कई काम महिलाओं ने बखूबी कर दिखाए हैं।

मूल रूप से अल्मोड़ा, उत्तराखंड की रहने वाली सौम्या पंत ने सात समंदर पार ब्रिटेन की सरज़मी पर भारत का नाम रोशन किया है। जी हां, सौम्या ने मिसेज यूके इंडिया 2019 प्रतियोगिता में पर्सनेलिटी ऑफ द ईयर का खिताब जीता है। उनके विनर बनने में उनके द्वारा पेश की गयी पहाड़ी संस्कृति की विशेष झलक और पर्यावरण को बचाने को लेकर उनकी तीव्र इच्छा का अहम योगदान रहा। उन्होंने उत्तराखंड और पहाड़ की संस्कृति पेश कर दुनिया को पहाड़ के रीति-रिवाज़ व गहरी संस्कृति से रूबरू कराया। इसके साथ ही उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान यह भी बताया कि वह प्रकृति से कितना प्रेम करती हैं और इसके संरक्षण के लिए क्या करना चाहती हैं। यह पहाड़ और प्रकृति से उनका प्यार ही है जो करीब दस साल तक ब्रिटेन में रहने के बाद उन्हें फिर से अपनी मातृभूमि में वापस खींच लाया है। अब वह पहाड़ में प्रकृति के करीब रहकर अपने लोगों से जुड़े रहना चाहती हैं। बता दें कि सौम्या की पैदाइश नैनीताल की है, लेकिन उन्होंने नवीं क्लास तक की पढ़ाई बुद्धिजीवियों का शहर कहे जाने वाले अल्मोड़ा से हासिल की है।

लेखक के साथ लंबी बातचीत में सौम्या कहती हैं कि मेरा पर्यावरण से इतना ज्यादा लगाव सिर्फ इसलिए है क्योंकि अल्मोड़ा से हूं, जो कि प्रकृति की गोद में बसा है। मैंने प्रकृति के करीब रहकर बहुत कुछ सीखा है, मेरी पर्सनेलिटी ऑफ द ईयर का अवार्ड जीतने की वजह भी यही है।

सौम्या कहती हैं कि सभी को पर्यावरण को बचाने का प्रयास करना चाहिए. क्योंकि हम सभी के लिए पर्यावरण बहुत अहम है। अगर आज हम प्रकृति की रक्षा करने के लिए कोशिश नहीं करेंगे तो हमारी भावी पीढ़ी इस खूबसूरती से महरूम हो जाएगी।

मिसेज यूके इंडिया प्रतियोगिता के बारे में सौम्या कहती हैं कि लगभग तीन महीने का समय होता है, सबसे पहले आपको एप्लीकेशन फॉर्म भरना होता है, उसके बाद आपका ऑडिशन होता है। जब आप चुन लिए जाते हैं तब इस प्रतियोगिता को लेकर आपकी यात्रा शुरू होती है। लोग आमतौर पर ब्यूटी पेजेंट को सुंदरता से संबंधित कांटेस्ट समझते हैं। लेकिन मिसेज इंडिया यूके थोड़ा अलग तरह का ब्यूटी पेजेंट है। इस मंच के माध्यम से आप समाज के लिए कुछ करने या योगदान देने की इच्छा को दिखा सकते हैं।

जैसा कि सौम्या ने कहा कि वह बचपन से ही पर्यावरण के लिए कुछ करना चाहती थी। इसलिए इस प्रतियोगिता के माध्यम से उन्होंने बताया कि वह किस तरह से और कैसे पर्यावरण को बचाने में योगदान देना चाहती हैं।

तीन महीने के दौरान प्रतिभागियों को क्लास दी जाती हैं, जिसमें बोलने, मेकअप से लेकर पूरे व्यक्तित्व को निखारने का काम किया जाता है। इस पूरी अवधि में खुद को सही ढंग से प्रस्तुत करना सिखाया जाता है। आत्मविश्वास भरने के लिए भी ट्रेनिंग दी जाती है। आप किस पड़ाव पर हैं, आपको क्या सीखने की जरूरत है, इस बात का ध्यान वहां विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी आधार पर ब्यूटी पेजेंट्स में आगे की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें न केवल ह्यूमन रिसोर्सेंज़ और लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग की कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। जब आपको इन सब चीजों में प्रशिक्षित कर दिया जाता है तो फिर प्रतिस्पर्धा शुरू होती है। जिसमें फिटनेस की परख होती है, साथ ही स्टेज पर खुद का परिचय देने के लिए भी कहा जाता है। जिसमें यह बताना होता है कि आप समाज के लिए क्या करना चाहते हैं, उस दौरान आप अपने आस-पास के लोगों या समाज के लिए क्या कर रहे हैं, यह भी देखा जाता है। आप समाज के लिए काम करने वाले किसी एनजीओ को सपोर्ट कर सकते हैं या फिर कोई अभियान भी चला सकते हैं।

इस प्रतिस्पर्धा में कुल 35 महिलाएं शामिल थी, सौम्या कहती हैं कि वह पहली श्रेणी में थी, जिसमें 14 महिलाएं थी(इसमें 22 साल से 45 साल तक की महिलाएं शामिल थी)। ये श्रेणियां उम्र के हिसाब से तय की जाती हैं।

 एक कामकाजी महिला होते हुए इस खिताब को जीतना कितना चुनौतीपूर्ण था, इसके जवाब में सौम्या कहती हैं मुश्किलें और चुनौतियां कम नहीं होती, खासतौर पर अगर आप विवाहित हों और जॉब कर रही हो, साथ ही आपके पास एक बच्चे की देखभाल करने की जिम्मेदारी भी हो। हालांकि मैं पार्ट टाइम जॉब कर रही थी। लेकिन मैं कहना चाहूंगी कि आपको घर, परिवार के अलावा खुद को भी समय देना चाहिए। आमतौर पर यह होता है कि शादी के बाद महिलाएं तमाम चीज़ों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि वे खुद के बारे में नहीं सोचतीं। अपने लिए वक्त भी नहीं निकालती हैं। आपके लिए सबसे पहले परिवार फिर नौकरी हो जाती है। सबसे आखिर में खुद की बारी आती है।

सौम्या कहती हैं कि महिलाओं को थोड़ा अलग ढंग से सोचना चाहिए, बिज़ी लाइफ में से थोड़ा वक्त अपने लिए निकालना चाहिए। अपनी किसी भी एक इच्छा है या रुचि उसका हमेशा ध्यान रखना चाहिए। वरना एक समय ऐसा भी आता है, जब आप खुद से पूछते हैं कि आपने अपने लिए आखिर क्या किया।

मुझे लगता है कि काम के साथ-साथ अपने लिए कुछ वक्त निकालना जरूरी है, हां, हम सब लोग बहुत बिज़ी रहते हैं, फिर भी आधा घंटा भी खुद को दिया जाय तो कुछ भी मुमकिन है।

क्या इस प्रतियोगिता का हिस्सा बनते वक्त आपने सोचा था कि आपको अवार्ड मिलेगा, इस पर सौम्या बड़े आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि उम्मीद पर तो दुनिया कायम है। मैंने निश्चित तौर पर यह सोचा था कि कुछ न कुछ तो इस प्रतियोगिता से मुझे हासिल होगा।

सौम्या के अनुसार, वह बचपन से ही अपने इरादों की बहुत पक्की हैं। जब उन्हें कुछ काम करना होता है, तो सौम्या उसे पूरा करने के लिए अपना सब कुछ झौंक देती हैं। जो लक्ष्य उन्हें हासिल करना होता है, उसे पाने तक हर वक्त उसी के बारे में सोचती रहती हैं। यही कारण है कि मुझे लगा कि मैं कुछ न कुछ तो इस स्पर्धा में पा ही लूंगी। और कुछ नहीं भी किया तो बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। जीत और हार ये सब हमारी बनायी हुई चीज़ें हैं। हमें हर प्रतिस्पर्धा खुद से करनी चाहिए। बकौल सौम्या, उन्होंने यही सोचकर इस प्रतियोगिता में शिरकत की थी। निश्चित रूप से यह सोचा था कि तीन महीने का जो समय है उसके पूरा होने के बाद मैं बहुत आगे होऊंगी।

इसके साथ ही हमें इस अवधि में हमारे कोच द्वारा एक चीज़ सिखायी गयी कि खुद के लिए पत्र लिखें। हम सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने लिए पत्र लिखा, जिसमें हमने अपनी एक साल की योजना के बारे में विस्तार से लिखा। जिस तरह हम नया साल आने पर रेजॉल्यूशन बनाते हैं, उसी तरह यह पत्र भी लिखा। फिनाले के बाद जब आप उस पत्र को पढ़ते हैं तो आपको पता चलता है कि आप कितना सीख गए हैं। इस दौरान आपने खुद को समय दिया होता है, कोई पुरस्कार मिलना ज्यादा बड़ी उपलब्धि नहीं लगता है। आपने अंदर से क्या सीखा है, क्या पाया है, वो महत्वपूर्ण होता है।

अवार्ड जीतने के बाद आपकी लाइफ में क्या बदलाव आया है, इसके जवाब में सौम्या कहती हैं कि मुझे एक चीज बहुत अच्छी लगी कि प्रतियोगिता के दौरान नेशनल कास्ट्यूम यानी राष्ट्रीय परिधान राउंड में मैंने अपने कुमाऊं की संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। उसके बाद मुझे किसी सेलेब्रिटी की जैसी फ़ीलिंग हुई। क्योंकि पूरे कुमाऊं ने मुझे बहुत प्यार दिया। मुझे बहुत सपोर्ट मिला, मेरे तमाम फॉलोअर्स बने, जिन्होंने पूरे जोश के साथ मेरे साथ दिया। वहीं कुमाऊं रेजिमेंट ने भी बहुत सहयोग किया, मैंने कुमाऊं रेजिमेंट को अपनी पेशकश डेडिकेट की थी। हर तरह से कुमाऊं और उत्तराखंड से पूरा सहयोग मुझे हासिल हुआ।

इसके साथ ही मैं अपने पति, सास और पिता जी के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों को धन्यवाद बोलना चाहती हूं, जिन्होंने इस मुकाम पर पहुंचने में मेरी पूरी मदद की। जिन्होंने अल्मोड़ा से बहुत सारी चीजें( परिधान व आभूषण) मेरे लिए लंदन भेजी, जहां मैंने प्रतियोगिता के दौरान अल्मोड़ा और कुमाऊं के परिधान पहने।

मिसेज यूके प्रतियोगिता में पर्सनेलिटी ऑफ द ईयर अवार्ड जीतने के बाद  सौम्या पंत ने  चीन की राजधानी बीजिंग में वरिष्ठ पत्रकार अनिल आज़ाद पांडेय के साथ ख़ास बातचीत की।

 

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