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Almora remembered his beloved poet Girish Tiwari Girda
कला संस्कृति

जगो-जागो ओ मेरा लाल….

जनकवि गिर्दा को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया

अल्मोड़ा। रिमझीम बारिश की फुआरों के साथ जब ‘स्वागत’ की छत माल रोड-अल्मोड़ा में गिर्दा के गीत गाए तो सड़क पर छाते लिए लोग रूक करवीडियो बनाने लगे।

Almora remembered his beloved poet Girish Tiwari Girda
जनकवि गिर्दा को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया

जन आंदोलनकारी, जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की नवीं पुण्यतिथि पर नगर ने याद किया। स्वागत की छत पर आयोजित कार्यक्रम में गिर्दा के लिखे-गाये लोकगीत गाकर कार्यक्रम की शुरूआत हुई। वरिष्ठ पत्रकार नवीन बिष्ट के संचालन में कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती रेवती बिष्ट ने की। स्वागत की छत में जुटे सांस्कृतिक कर्मी, साहित्यकार, कलाकारों ने झोड़े और गीत गाकर गिर्दा को याद किया। सबसे पहले आज हिमाला तुमनकैं धत्यूछों, जागो जागो ओ मेरा लाल … गीत गाया, इसके बाद इतुक नि लगा उदेख घुनन मुनई न टेक, जैंता एक दिन त आलो उ दिन य दुणी मैं…। इस दौरान पूरन बोरा की छोलिया टीम ने शानदार प्रस्तुति दी।

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कार्यक्रम में बोलते हुए डाॅ. कपिलेश भोज ने कहा कि गिर्दा पुण्यतिथि का आज का दिन समाज के लिए काम करने वाले लोगों को प्रेरणा देने वाला है। जो लोगों के लिए काम करेगा उसे हमेशा ऐसे ही सलाम किया जाएगा। पत्रकार पीसी तिवारी ने कहा कि गिर्दा ने हमेशा जन आंदोलनों के साथ रहे, बिना किसी की परवाह किए आम आदमी के पक्ष में खड़े रहे। उत्तराखण्ड में घूम-घूम कर लोक गीतों के माध्यम से आंदोलन को धार देते रहे।

उनको हमेशा एक आंदोलनकारी के रूप में याद किया जाएगा। जो कुछ उन्होंने ने किया वह आगे भी किया जाता रहेगा। हम ऐसे ही आयोजनों के माध्यम से गिर्दा को हमेशा याद करते रहेंगे। नवीन बिष्ट ने कहा कि गिर्दा पहाड़ के सभी आंदोलन में सबसे आगे रहे। जंगल की बात या शराब के खिलाफ महिलाओं का सड़क पर उतरना या फिर राज्य के लिए चला आंदोलन हो सभी में वह एक आंदोलनकारी के रूप में शामिल हुए और पूरे मनोयोग से जुड़े रहे। श्रीमती रेवती देवी ने गिर्दा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों को उन्हीं के किए कार्यों से याद किया जाता है।

आयोजन का समापन सावनी सांझ आकाश खुला है ओ हो रे सांझ निराली… झोड़ा गाकर किया। कार्यक्रम में शीला पंत, विमला बोरा, राधा बंगारी, नर्मदा तिवारी, मुन्नी पाटनी, वरिष्ठ पत्रकार पीसी तिवारी, शंभू राणा, लोक गायक कृष्ण मोहन सिंह बिष्ट ‘नन्दा’, गोपाल चम्याल, हयात रावत, चन्दन बोरा, पीसी तिवारी, ईश्वर चन्द्र जोशी, दीवान नगरकोटी, नीरज भट्ट, रंगकर्मी रमेश लाल, वरिष्ठ साहित्यकार त्रिभुवन गिरी महाराज, डाॅ. चन्द्र प्रकाश फुलोरिया, प्रो. एन.डी. काण्डपाल सहित तमाम साहित्यकार, रंगकर्मी लोग मौजूद थे।

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