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हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का श्राद्ध जरूरी, कल से शुरू होंगे श्राद्ध

Report ring Desk

सोमवार से पितृ पक्ष आरंभ होने जा रहा है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की संतुष्टि के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है जिससे पितर खुश होकर अपने संतान को आशीर्वाद देते हैं। इससे घर-परिवार में धन-दौलत, सुख-सुविधा, मान-सम्मान और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का श्राद्ध करना जरूरी होता है। माना जाता है कि यदि श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है।

इस साल पितृ पक्ष 20 सितंबर को शुरू हो रहा है, जो 6 अक्टूबर तक रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक होता है। 20 सितम्बर को पूर्णिमा श्राद्ध और 21 सितम्बर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा। पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध करने और तर्पण देने का विशेष महत्व होता है। पितरों का तर्पण करने का मतलब उन्हें जल देना है। इसके लिए प्रति दिन सुबह उठकर स्ïनान आदि से निवृत होकर तर्पण की सामग्री लेकर दक्षिण की ओर मुंह करके बैठ जाए। अब सबसे पहले अपने हाथ में कुश, जल, अक्षत, पुष्प और तिल लेकर दोनों हाथ जोड़कर अपने पितरों का ध्यान करते हुए उन्हें आमंत्रित करें।

इस दौरान ‘ऊॅं आगच्छन्तु में पितर और ग्रहन्तु जलान्जलिम’ का जप करें। अब उसे पितरों का नाम लेते हुए पृथ्वी पर गिरा दें। इसी तरह 5, 7 या 11 बार अंजली दें। जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें। जिस तिथि को आपके पितरों की मृत्यु हुई हो। उस तिथि को उनके नाम से अपनी श्रद्धा और यथाशक्ति के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन करवाएं। भोजन कौओं को भी खिलाएं।

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