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‘आजीविका’ की महिलाओं का कमाल, देश दुनिया में मचाया धमाल

पहाड़ में बेरोजगारी और पलायन बड़ी समस्या रही है। कोरोना के दौर में जब महानगरों से लोग गांवों के लिए लौट रहे हैं तब ये सवाल और ज्वलंत हो जाते हैं। अल्मोड़ा का आजीविका स्वयं सहायता समूह प्रवासियों के लिए प्रेरणा बन सकता है। इससे करीब तीन हजार महिलाओं को रोजगार मिला है। यह समूह कपड़े सिलने से लेकर, बेकरी , फल प्रोसेसिंग यूनिट, ब्यूटी प्रोडक्ट के साथ राइस मिल, तेल मिल, आटा मिल व मसाले तैयार करने आदि लघु उद्योगों को स्थापित कर रहा है। इतना ही नहीं समूह ने शहरों से लौटे युवाओं के लिए लघु उद्योगों में मार्केटिंग और प्रोडक्शन के क्षेत्र में जाॅब के अवसर भी खोले हैं।

By Digvijay Bisht, Almora

गांवों एक ओर गेहूं की कटाई का जोर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर यहां सिलाई मशीन की खट-खट की आवाज इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय तक में सुनी जा रही है। कोरोना (कोविड-19) के शोर में सिलाई मशीन की ये आवाज दुनिया को बता रही है कि महिलाएं किसी से कम नहीं। इनके हाथों बने मास्क बीमारी और जिंदगी के बीच लक्ष्मण रेखा खींच रहे हैं। ये महिलाएं गांव में घूमकर लक्ष्मण रेखा का पालन करने और उचित सामाजिक दूरी बनाने का पाठ भी पढ़ा रही हैं। वह भी तब जब परदेस गए लोग गांवों को लौट रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान से ये पहले से ही जुड़ी हुई हैं। अल्मोड़ा जिले में ‘आजीविका’ के माध्यम से लगभग 2300 स्वयं सहायता समूह पूरी मेहनत से अपने क्षेत्रों को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ये समूह एक ओर रोजगार पैदा कर रहे हैं दूसरी और वर्ग भेद मिटा सरकारी नियमों को गांव-गांव में पहुंचा रहे हैं।

अल्मोड़ा जिले में एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत गठित स्वयं सहायता समूह ने दुनिया के सामने मिसाल पेश की है। उनके कार्य ने अल्मोड़ा को ही नहीं देश को भी एक नई पहचान दी है। घर का चूल्हा-चैका संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अर्थव्यवस्था की धुरी बन रही हैं। ये स्वयं सहायता समूह कभी माॅनीआर्डर अर्थव्यस्था से पहचाने जाने वाले उत्तराखण्ड के गांवों में आज पलायन को थामने का ऐलान कर रहे हैं। महानगरों से लौटने वालों के लिए भी ‘आजीविका’ ने गांव में रोजगार उपलब्ध कराने का प्लान बनाया है।

लमगड़ा, धौलादेवी और भैंसियाछाना से हुई शुरूआत

आजीविका के कैलाश भट्ट बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2004 में जिले के तीन ब्लाक लमगड़ा, धौलादेवी और भैंसियाछाना से हुई। रिजल्ट अच्छा आने के कारण नये-नये कार्य मिलते गए और आज उनका प्रोजेक्ट लगभग पूरे जिले में चल कर रहा है। आजीविका से आज 2300 समूह जुड़े हैं। हर समूह में 10-12 सदस्य हैं। प्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में 25 से 27 हजार से ज्यादा परिवार जुड़े हैं। जो स्वरोजगार की राह के राही हैं। प्रदेशभर में चल रहे आजीविका के प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा ब्लाक अल्मोड़ा में कवर हैं।

मास्क बनाने में मास्टर हैं महिलाएं

अल्मोड़ा के गांवों में महिलाओं ने मई के पहले पखवाड़े में ढाई लाख से ज्यादा मास्क बना दिए हैं। ये मास्क सरकारी विभागों के साथ जो जरूरतमंद हैं उन्हें मुफ्त में दिए जा रहे हैं। महिलाओं को एक मास्क बनाने के ऐवज में 5 रुपए दिए जा रहे हैं। कपड़ा भी मुहैया कराया जा रहा है। एक महिला दो से तीन घंटे में 100 से ज्यादा मास्क बना रही है। जिससे इन्हें घर बैठे रोजगार मिल रहा हैै।

घर-घर पहुंचाया राशन और सामान

आजीविका परियोजना के तहत बनाए गए समूहों ने घर-घर तक राशन पहुंचाने का कार्य भी किया है। महिला समूह की सदस्यों ने राशन-सब्जी के साथ दैनिक उपयोग की वस्तुओं की जानकारी ग्रामीणों से ली। उसके बाद उनकी आवश्यकता के अनुसार उन तक सभी सामग्री पहुंचाई। उनके इस कार्य से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली। अब नये लोग भी समूहों से जुड़ने की बात कह रहे हैं।

गांवों में लघु उद्योग से पैदा हुआ रोजगार

आजीविका परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में उद्योग लगाए गए हैं। हवालबाग ब्लाक में बेकरी, फल प्रसंस्करण यूनिट के साथ ब्यूटी प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। द्वाराहटा में राइस  मिल लगाई गई। चैखुटिया में राइस  मिल के साथ आटा मिल कार्य कर रही है। भिक्यिासैंण में मसाला यूनिट कार्य कर रही है। स्याल्दे में सरसों की पिराई तेल की यूनिट लगाई गई है।

समूह को मिला रोजगार, लोगों को महंगाई से राहत

लाॅकडाॅउन के दौरान जब ग्रामीण इलाकों में 30 रुपये किलो आटा बेचा जा रहा था, तो आजीविका ने इसे 25 रुपये किलो में उपलब्ध कराया। हल्द्वानी से गेहूं खरीद कर अपनी यूनिटों में पिसाई कराई। इससे जहां समूह वालों को रोजगार मिला वहीं लोगों को महंगाई से राहत मिली।

मार्केटिंग और प्रोडक्शन के क्षेत्र में जाॅब के अवसर

कैलाश भट्ट ने बताते हैं उनके पास घर लौटे बेरोजगारों के लिए पूरा प्लान तैयार है। जिले में आजीविका की 12 फैक्ट्री चल रही हैं। जिसमें बेकरी यूनिट, फल प्रोसेसिंग यूनिट, ब्यूटी प्रोडक्ट के साथ राइस मिल, तेल मिल, आटा मिल, मसाले की यूनिट आदि कार्य कर रही हैं। इसमें मार्केटिंग से लेकर प्रोडक्शन और कलेक्शन तक में लोगों की आवश्यकता है। यहां से रोजगार मिलने की अपार संभावना है। लोगों की उपलब्धता को देखते हुए जल्द ही जिले में और उद्योग भी स्थापित किए जाएंगे। सरकार की ओर से प्लान तैयार है। जरूरत है तो कर्मठ और जुझारू युवाओं की जो घर में ही रोजगार करना चाहते हैं। हमारी कोशिश गांवों को फिर से आबाद करना है। उस में हम कुछ हद तक सफल भी हुए हैं।

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