रोचक

तुझ संग प्रीत लगाई सजना…

By Trilok Singh Negi

जी हां, साथ जीने और साथ मरने की कसम जो ली थी देवदार के पेड़ और बोगनविलिया के बेल ने। बुधवार की जब सुबह चिड़ियां अपने इस आशियाने से दाने लेने को विदा ले रही थी, उस वक्त सावन की बारिश में देवदार के साथ बोगनविलिया जमीदोज हो गया। अल्मोड़ा नगर की रौनक हेड पोस्ट आफिस के सामने के पार्क में देवदार के पेड़ से लिपटी बेल अब सिर्फ यादों में रह गयी है। शायद ही किसी को याद हो देवदार और बोगनविलिया के मिलन का समय, पर जिसने भी देखा उन्होंने देवदार के पेड़ से लिपटे हुए ही पाया। कितना सुखद अहसास देता था जब फूल खिल के अपनी सुन्दरता से अल्मोड़ा का सुशोभित कर देता था। अल्मोड़ा शहर की रौनक हुआ करता था। जिस प्रकार घर के टेबल में रखा फूलदान अचानक से टूट जाए कैसा लगता है मन, ठीक उसी प्रकार अचानक से बेल भी पेड़ के साथ देवदार में समाहित हो गया।

कहने को तो बोगनविलिया की बेल की बात की जा रही है परन्तु उस देवदार की बात कोई नहीं करता जिसने बेल को बाल्यकाल से ही सहारा देकर इस लायक बनाया कि वह अपने यौवन काल मेें सबको सम्मोहित कर सके और उस बेल ने भी इस उम्मीद के साथ धीरे-धीरे उन आशाओं को जीवन्त बनाये रखा। बेल की शोभा सबने देखी पर उस देवदार की दशा और स्थिति पर किसी का ध्यान नहीं गया जिसने उस बेल को अपने सीने से लगाकर इस लायक बना दिया कि वह अपनी कृति को चारों और फैला सकें।
दूर से देखने पर सबने तारीफ ही की बोगनविलिया के बेल की पर पास आकर किसी ने देखने और समझने की कोशिश भी नहीं की कि जिस बेल को सहारा देकर इस लायक बना दिया उस पेड़ की उम्र और स्थिति क्या रही होगी?

बातें हैं बातों का क्या?
अब जब बोगनविलिया की बेल और उसको मजबूती से खड़ा करने वाला देवदार का पेड़ काल ग्रसित हो गया है तो लोगों के बातों का सिलसिला भी चलता रहेगा कुछ समय तक । तर्केदार और कहनेवाले यहाॅ तक कह रहे हैं कि पानी की निकासी ना होने के कारण वह पेड़ जड़ से उखड़ गया। कहने वाले तो यहाॅ तक कह रहे हैं कि पेड़ बूढ़ा हो चुका था, अपनी उम्र पूरी कर चुका था। पर क्या यही सोच हमारी रह जाती है कि जो बुढ़ा हो गया वो किसी काम का नहीं , उसकी देखभाल करने की भी क्या जरूरत है, आदमी स्वार्थी हो गया है आजकल और जो जिस स्थिति में है उसे वैसा ही छोड़ दिया जाए। यही हाले सूरत आजकल हर घर परिवार में हो गयी है, बुर्जुगों को देखने और उनकी मनोदशा को समझने वाला कोई नहीं।

क्या करें क्या ना करें , ये कैसी मुश्किल हाय
आज हर परिवार में यही स्थिति हो गयाी है, परिवार के स्तम्भ आज उदास और व्याकुल तथा चिंतित है, वर्तमान स्थिति एकल परिवार और स्वार्थवश हो गया। वह दिन दूर नहीं जब हमारी जड़े खोखली होती जाएंगी और उन्हें सहारा देने वाला कोई नहीं रहेगा।अभी भी समय है, जरूरत है सहारे को एक सहारे की।

और स्टेटस से लिपटा बोगनबेलिया
बुधवार की सुबह पंत पार्क के देवदार और बोगनबेलिया के सड़क पर गिरने की खबर आई। उसके नगर के तमाम लोगों के स्टेटस में देवदार-बोगनबेलिया उग आया और सीना ताने खड़ा हो गया। जो युवा कोविट -19 कोरोना के दौर में घर नहीं लौटे परदेस में ही डटे हैं। उनके फोन पर फोन बजने लगे हर किसी ने अपने स्टेट में धड़ाधड़ इसकी फोटो अपडेट की।

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